शिखिल ब्यौहार, भोपाल। सितंबर का आधा महीना बीतने के बाद भी मध्यप्रदेश में छात्र संघ चुनाव को लेकर सरकार ने स्थिति स्पष्ट नहीं की है। इससे छात्र संगठनों में नाराजगी है। दरअसल, प्रदेश के सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पिछले 6 साल से छात्र संघ चुनाव नहीं हुए हैं। हर साल सरकार तारीख बढ़ाने या स्थगित करने का आदेश जारी कर देती है। इस बार भी उच्च शिक्षा विभाग ने अब तक कोई कैलेंडर जारी नहीं किया है।
इस मामले को लेकर उच्च शिक्षा विभाग ने पहले 10 सितंबर तक चुनाव प्रक्रिया का आश्वासन दिया था। उधर, NSUI और ABVP दोनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। NSUI उपाध्यक्ष रवि परमार का कहना है कि सरकार छात्रों को लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित कर रही है, जबकि ABVP के प्रदेश मंत्री केतन चतुर्वेदी ने भी कहा कि चुनाव न होने से कैंपस में छात्र मुद्दे उठाने वाला कोई मंच नहीं बचा।
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छात्र नेताओं का आरोप है कि सरकार को डर है कि चुनाव हुए तो कैंपस में बेरोजगारी और फीस वृद्धि जैसे मुद्दे हावी हो जाएंगे। दोनों ही संगठनों ने कहा है कि यदि जल्द से जल्द छात्र संघ चुनाव को लेकर सरकार ने अधिसूचना जारी नहीं की तो पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन होगा। छात्र संघ चुनावी सस्पेंस को लेकर सियासत भी जोर पकड़ रही है।
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वहीं कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता डॉ विक्रम चौधरी ने कहा कि यह सरकार के डर को दिखाता है। जनाधार खोती जा रही बीजेपी नहीं चाहती कि युवाओं का नकारात्मक रुझान प्रदेश के सामने परिणामों के माध्यम से सामने आए। वहीं बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता विवेक गुप्ता ने दावा किया कि छात्र नेतृत्व और राजनीति में पार्टी विश्वास रखती है। सरकार जल्द ही विधिक राय लेने के बाद चुनाव की प्रक्रिया तेज करेगी।
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