राजकुमार दुबे, भानुप्रतापपुर। कांकेर जिले में वनाधिकार पट्टे की उम्मीद में जंगल की बड़े पैमाने पर कटाई का मामला सामने आया है। कोरर वन क्षेत्र के खड़का भुरका इलाके में स्थित कच्छ डोंगरी में सैकड़ों हरे-भरे और इमारती पेड़ों की कटाई कर दिए गए हैं।

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जंगल में हरे-भरे पेड़ों की कटाई का खुलासा स्थानीय ग्रामीणों के मौके पर पहुंचने पर हुआ. ग्रामीणों के मुताबिक, 500 से ज्यादा हरे-भरे इमारती पेड़ काटे जा चुके हैं। यह सब वनाधिकार पट्टा हासिल करने की लालच में किया गया है। ग्रामीणों के आरोपों की जांच करने लल्लूराम डॉट कॉम की टीम को करीब दो किलोमीटर तक पैदल पहाड़ी रास्ते से जाना पड़ा।

रास्ते में बरसाती नाले मिले और दुर्गम रास्ते को पार करने के बाद टीम उस जगह पहुंची, जहां बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई के निशान मिले। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब आम लोगों के लिए यहां पहुंचना इतना मुश्किल है, तो क्या वन विभाग की नियमित गश्त और निगरानी भी इस इलाके तक नहीं पहुंची?

ग्रामीणों का कहना है कि वे अपने जंगल और वन संपदा की सुरक्षा के लिए समय-समय पर जंगल का निरीक्षण करते हैं। इसी निरीक्षण के दौरान उन्हें बड़ी संख्या में पेड़ कटे हुए मिले। इसके बाद ग्रामीणों ने आसपास के इलाके में पड़ताल की तो कटाई का दायरा और भी बड़ा नजर आया। ग्रामीणों के मुताबिक, 500 तक पेड़ काटे जाने की आशंका है।

अगर यह आंकड़ा जांच में सही साबित होता है तो सवाल केवल अवैध कटाई करने वालों पर ही नहीं, बल्कि वन विभाग की निगरानी और मैदानी अमले की कार्यप्रणाली पर भी उठेंगे। वन क्षेत्र में इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई एक-दो दिन में होना मुश्किल है। पेड़ों की कटाई, उन्हें जमीन से हटाना और जंगल के हिस्से को साफ करना—इस पूरी प्रक्रिया में समय लगता है।

इस पूरे मामले में हमने कांकेर वन मंडल के वन मंडलाधिकारी से भी संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। वहीं कांकेर कलेक्टर कुंदन कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराने की बात कही है।

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