कुंदन कुमार, पटना। ​बिहार के जहानाबाद सदर अस्पताल से स्वास्थ्य व्यवस्था डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर किसी भी संवेदनशील दिल को झकझोर कर रख दे। अस्पताल में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की गंभीर लापरवाही के चलते मानवता एक बार फिर तार-तार हुई है, जहां सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल और मल्टीपल फ्रैक्चर से जूझ रहे दो किशोरों के इलाज के नाम पर कोरा मजाक किया गया। डॉक्टरों ने फ्रैक्चर वाले पैर में प्लास्टर चढ़ाने की जहमत तक नहीं उठाई, बल्कि दवा का कॉटन गट्टा फाड़कर पैर में लपेटा और आनन-फानन में पीएमसीएच रेफर कर दिया।

​क्या है पूरा मामला और कैसे बरती गई लापरवाही?

​यह सनसनीखेज मामला गुरुवार का है। दो बाइकों के बीच हुई आमने-सामने की भीषण टक्कर में चार किशोर बुरी तरह जख्मी हो गए थे। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को तुरंत जहानाबाद सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में पहुंचाया गया।
​अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक, रामगंज निवासी पहलाद कुमार को दोपहर 1:05 बजे और धर्मपुर निवासी 16 वर्षीय राजा कुमार को दोपहर 1:32 बजे इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया। दोनों किशोरों की हालत बेहद नाज़ुक थी और उनके पैरों में गंभीर मल्टीपल फ्रैक्चर साफ दिख रहा था। इसके बावजूद इमरजेंसी में ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों ने उनकी गंभीर स्थिति को दरकिनार करते हुए सिर्फ पर्ची पर ‘रेफर’ लिखकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।

​नियमों को ताक पर रखकर स्वास्थ्य कर्मियों का खेल

​डॉक्टरों के आदेश के बाद वहां मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों ने संवेदनहीनता की सारी हदें पार कर दीं। मेडिकल प्रोटोकॉल के मुताबिक, मल्टीपल फ्रैक्चर और गंभीर चोटों वाले मरीजों को संक्रमण (इंफेक्शन) से बचाने और हड्डी को स्थिर रखने के लिए सपोर्टिव स्लैब या प्लास्टर लगाना अनिवार्य होता है।
​लेकिन सदर अस्पताल के कर्मचारियों ने नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए स्लैब लगाने के बजाय दवा के खाली डिब्बों से कॉटन (रुई) और गट्टा निकाला और उसे ही घायल किशोरों के पैरों पर लपेट कर इतिश्री कर ली। इस तरह की लचर और गैर-जिम्मेदाराना व्यवस्था ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों के दावों की पोल खोल दी है और सोशल मीडिया से लेकर डिजिटल गलियारों में यह खबर चर्चा का विषय बन गई है।