कुंदन कुमार/पटना। राजधानी पटना के बीआईए भवन में 8वें राष्ट्रीय जन औषधि दिवस का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर राज्य के औषधि नियंत्रक (ड्रग कंट्रोलर) नित्यानंद किश्लय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में राज्य भर से आए जन औषधि पदाधिकारी और केमिस्टों ने हिस्सा लिया, जहां प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना की सफलताओं और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की गई।

​भ्रांतियों को दूर करने के लिए विशेष तकनीकी सत्र

​कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने जेनेरिक दवाओं को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने पर जोर दिया। औषधि नियंत्रक नित्यानंद किश्लय ने बताया कि जन औषधि केंद्रों पर मिलने वाली दवाइयां गुणवत्ता में ब्रांडेड दवाओं के समान ही प्रभावी होती हैं। कार्यक्रम में एक विशेष ‘तकनीकल सेशन’ भी आयोजित किया गया, जिसमें केमिस्टों को दवाओं के उचित रखरखाव, भंडारण और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी गई।

​पटना: जेनेरिक दवाओं की खपत में अव्वल

​बिहार में जेनेरिक दवाओं की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ रही है। औषधि नियंत्रक ने जानकारी साझा की कि पटना जिला पूरे बिहार में जेनेरिक दवाओं की सबसे ज्यादा खपत करने वाला जिला बनकर उभरा है। उन्होंने कहा, यह बढ़ती बिक्री इस बात का प्रमाण है कि अब लोगों का भरोसा जेनेरिक दवाओं पर बढ़ चुका है।

​नेटवर्क का विस्तार और दवाओं की उपलब्धता

​दवाओं की किल्लत को समाप्त करने के लिए पटना में विशेष डिपो खोला गया है, जिससे अब केंद्रों पर सभी जरूरी दवाइयां हर समय उपलब्ध रहेंगी। वर्तमान में बिहार में 350 से अधिक जन औषधि केंद्र संचालित हैं। वहीं, केंद्र सरकार का लक्ष्य पूरे भारत में इन केंद्रों की संख्या को बढ़ाकर 20,000 करने का है, ताकि किफायती इलाज हर नागरिक की पहुंच में हो।