आम आदमी पार्टी के भीतर भूचाल आया हुआ है. राघव चड्ढा समेत आम आदमी पार्टी के बागी सांसद बीजेपी मुख्यालय पहुंचकर पार्टी अध्यक्ष बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात कर रहे हैं. राघव के साथ संदीप पाठक और अशोक मित्तल भी मौजूद हैं. AAP के इन बागी नेताओं ने आधिकारिक तौर पर बीजेपी ज्वाइन कर ली है. इस मौके पर नितिन नबीन ने सभी को पार्टी की सदस्यता दिलाई और मिठाई खिलाकर पार्टी में उनका स्वागत किया.
बता दें कि, राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी यानी आप (AAP) छोड़ने का ऐलान कर दिया है. आप पार्टी छोड़ने के साथ ही राघव चड्ढा ने बीजेपी में शामिल करने का भी ऐलान किया है. राघव चड्ढा ने संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भाजपा में शामिल होने का ऐलान किया. साथ ही राघव ने आप के दो तिहाई सांसद और दिल्ली में नेता विपक्ष भी बीजेपी में शामिल होने का दावा किया है. इनमें स्वाती मालिवाल, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रम साहनी, संदीप पाठक, राजेंद्र गुप्ता का नाम शामिल है.
‘मैं गलत पार्टी में सही आदमी…’
संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, AAP सांसद राघव चड्ढा ने कहा, “हमने फैसला किया है कि हम, राज्यसभा में AAP के 2/3 सदस्य, भारत के संविधान के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए खुद को बीजेपी में मिला लेंगे.”
उन्होंने आगे कहा कि AAP को मैंने अपने खून-पसीने से सींचा और अपनी जवानी के 15 साल दिए, अब अपने सिद्धांतों, मूल्यों और मूल नैतिकता से भटक गई है. अब यह पार्टी देश के हित में नहीं, बल्कि अपने निजी फ़ायदे के लिए काम करती है. पिछले कुछ सालों से, मुझे यह महसूस हो रहा था कि मैं गलत पार्टी में सही आदमी हूं. इसलिए, आज हम यह ऐलान करते हैं कि मैं AAP से खुद को अलग कर रहा हूं और जनता के करीब जा रहा हूं.
संसद में AAP हुई कमजोर!
आम आदमी पार्टी के पास राज्यसभा में कुल 10 सांसद थे, जिनमें 7 पंजाब और 3 दिल्ली से हैं. हालांकि, आज पार्टी को उस वक्त जबरदस्त झटका लगा, जब तीन प्रमुख सांसदों- राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए पार्टी छोड़ दी और औपचारिक रूप से बीजेपी में शामिल हो गए. इन तीनों सांसदों ने अपने इस्तीफे के साथ ही यह दावा किया है कि राज्यसभा में पार्टी के दो-तिहाई से ज्यादा सांसद अब उनके (बीजेपी) साथ हैं.
इससे पहले दिल्ली विधानसभा चुनावों के दौरान स्वाति मालीवाल भी बगावती रुख अपना चुकी थीं. अब राघव, संदीप और अशोक के जाने से अरविंद केजरीवाल की राज्यसभा में ताकत आधी से भी कम रह गई है. इस बड़ी टूट ने आम आदमी पार्टी के भविष्य और उसकी सांगठनिक एकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
इस बगावत के पीछे दिल्ली चुनाव में हुई पार्टी की हार एक बड़ी वजह रही है. दिल्ली की विफलता के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने संदीप पाठक को हाशिए पर धकेल दिया था. चुनाव प्रचार के आखिरी चरण में पाठक को अहम फैसले लेने वाली प्रक्रियाओं से पूरी तरह बाहर कर दिया गया था. संदीप पाठक 2022 के पंजाब चुनाव अभियान के दौरान लाइमलाइट में आए थे. साल 2022 से 2024 के आखिरी तक पाठक ही ‘AAP’ के अंदर हर बड़ी रणनीतिक फैसला लेते थे. हालांकि, बाद में उन्हें सिर्फ छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाकर सीमित कर दिया गया, जबकि मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन को पंजाब, आतिशी को गोवा और गोपाल राय व दुर्गेश पाठक को गुजरात जैसे महत्वपूर्ण राज्यों की जिम्मेदारी दी गई.
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