Lalluram Desk. भोलेनाथ को खुश करने के लिए जल, भस्म, धतूरा और बेलपत्र मुख्य रूप से चढ़ाए जाते हैं। बेलपत्र के बिना शंकरजी की पूजा पूरी नहीं मानी जाती। हालांकि, शास्त्रों में शिवलिंग पर चढ़ाए जाने वाले बेलपत्र को तोड़ने को लेकर कुछ सख्त नियम और निर्देश बताए जाए हैं। यदि इन नियमों पर ध्यान न दिया जाए तो पूजा का फल मिलने के जगह दोष लग सकता है।
इन दिनों पेड़ से बेलपत्र तोड़ने से बचें
हिंदू धर्म की परंपराओं के मुताबिक बेलपत्र को किसी भी समय या किसी भी दिन तोड़ना मना किया गया है। शास्त्रों में कुछ विशेष तिथियों और वारों का जिक्र मिलता है जब बेलपत्र तोड़ने की सख्त मनाही है।
1.विशेष तिथियां: चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या इस तिथियों में बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए
2.विशेष अवसर: संक्रांति का दिन
3.विशेष वार: सोमवार
इन तिथियों संक्रांति या सोमवार के दिन बेलपत्र तोडने से शुभ कर्मों के फल में कमी आने लगती है और मनुष्य को दोष का भागी बनना पड़ता है। ग्रंथों में इसका उल्लेख है कि निषिद्ध समय पर बेलपत्र तोड़ने से पाप की प्राप्ति होती है।
पूजा का लाभ पाने के लिए करें ये काम
1.यदि सोमवार या उपर्युक्त तिथियों पर भगवान शंकर का पूजन करना हो तो इसके लिए शास्त्रों में बहुत सरल उपाय बताए गए हैं।
2.सोमवार या किसी विशेष तिथि पर बेलपत्र चढ़ाने के लिए उसे एक दिन पहले ही तोड़कर रख लेना चाहिए।
3.यदि ताजा बेलपत्र समय पर न मिला तो शिवलिंग पर पहले से चढें हुए बेलपत्र को साफ जल से धोकर दोबारा भोलेनाथ को चढ़ाया जा सकता है।
4.बेलपत्र तोड़ते समय मन में शंकर जी का स्मरण करना चाहिए।
5.बेलपत्र की पूरी टहनी या डाली को कभी नहीं तोड़ना चाहिए केवल तीन पत्तियों वाले भाग को ही सावधानी से अलग करना चाहिए ताकि वृक्ष को कोई नुकसान न पहुंचे।
6.शाम के समय या सूर्यास्त के बाद भी बेलपत्र तोड़ना शुभ नहीं माना गया है।
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