IAS Shikhar Agarwal Case: जयपुर में IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल से जुड़े 40 विला-कॉटेज खरीद विवाद को लेकर राजस्थान की राजनीति गरमा गई है। पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने सोमवार को भजनलाल सरकार पर अधिकारी को बचाने का आरोप लगाया।

उन्होंने ACB से जांच कराने के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब ACB मुख्यमंत्री के अधीन है और शिखर अग्रवाल पहले संबंधित अधिकारियों के बॉस रह चुके हैं, तो निष्पक्ष जांच कैसे होगी? खाचरियावास ने मामले की न्यायिक जांच के साथ ED और CBI से कार्रवाई कराने की मांग भी उठाई।
ACB जांच पर खाचरियावास ने उठाए सवाल
मीडिया से बातचीत में प्रताप सिंह खाचरियावास ने दावा किया कि IAS शिखर अग्रवाल के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े सबूत सामने हैं। इसके बावजूद उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामले में तुरंत गिरफ्तारी होनी चाहिए।
खाचरियावास का आरोप है कि राज्य सरकार ने मामले को दबाने के लिए जांच ACB को सौंपी है। उन्होंने सवाल किया कि जब ACB मुख्यमंत्री के अधीन है तो जांच की निष्पक्षता कैसे सुनिश्चित होगी? उन्होंने यह भी कहा कि शिखर अग्रवाल जिन अधिकारियों के बॉस रह चुके हैं, उनसे जुड़े मामलों की जांच में निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
ED-CBI में मुकदमा दर्ज कराने की चेतावनी
कांग्रेस नेता ने कहा कि शिखर अग्रवाल ने अपनी शक्तियों का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया है। यदि राज्य सरकार इस मामले की जांच ED और CBI को नहीं सौंपती है तो कांग्रेस इन दोनों एजेंसियों में मुकदमा दर्ज कराएगी।
उन्होंने मामले की न्यायिक जांच कराने की भी मांग की। खाचरियावास ने कहा कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से राज्य सरकार को जांच कराने की पहल करनी चाहिए, ताकि निष्पक्ष तरीके से पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।
अनंता रिसोर्ट को लेकर भी उठाए सवाल
खाचरियावास ने जमवारामगढ़ स्थित अनंता रिसोर्ट का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि वन विभाग की जमीन पर नियमों को ताक पर रखकर रिसोर्ट बनाया गया।
उन्होंने राज्य सरकार से रिसोर्ट के मालिकों से पूछताछ करने की मांग की। साथ ही कहा कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि रिसोर्ट में किन लोगों का पैसा लगा है और पूरी परियोजना में किनकी भूमिका रही है।
ज्वेल्स ऑफ इंडिया प्रोजेक्ट में IAS-IPS अधिकारियों की जांच की मांग
पूर्व मंत्री ने जयपुर के जेएलएन मार्ग स्थित अल्ट्रा-लग्जरी रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट ज्वेल्स ऑफ इंडिया का मामला भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रोजेक्ट में IAS और IPS अधिकारियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए।
खाचरियावास ने दावा किया कि इस जमीन को उद्योग के लिए आवंटित किया गया था, लेकिन अब इससे जुड़ी पत्रावलियां गायब हैं। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट में कई IAS-IPS अधिकारियों के फ्लैट हैं, जिनकी कीमत 10 से 20 करोड़ रुपये तक है। उनके मुताबिक, शिखर अग्रवाल से जुड़े मामले की जांच होने पर कई नेताओं की भूमिका भी सामने आ सकती है।
3000 करोड़ की जमीन सरकार के अधीन लेने की मांग
खाचरियावास ने जयपुर में फन किंगडम के पास स्थित जमीन का मामला भी उठाया। उन्होंने इस जमीन की कीमत करीब 3000 करोड़ रुपये बताते हुए आरोप लगाया कि इसमें भी शिखर अग्रवाल ने गड़बड़ी की है।
उन्होंने सरकार से जमीन को वापस अपने अधीन लेने की मांग की। खाचरियावास का कहना है कि इससे मिलने वाले संसाधनों का इस्तेमाल स्कूलों और अस्पतालों की स्थिति सुधारने के साथ युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देने में किया जा सकता है।
सरकार बदलने पर कार्रवाई की चेतावनी
प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि प्रदेश में सरकार बदलने के बाद भाजपा शासन में भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारियों और नेताओं को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने शिखर अग्रवाल से जुड़े मामलों की न्यायिक जांच कराने पर जोर देते हुए सरकार को पूरे प्रकरण में जवाब देने की चुनौती दी।
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