Dharm Desk- 15 मई को सुबह 6.28 मिनट पर सूर्य देव वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे. इस बार संक्रांति का महत्व इसलिए और बढ़ गया है, क्योंकि पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है. यह योग सुबह 5:30 बजे से रात 8:14 बजे तक रहेगा. जिसे हर प्रकार के शुभ कार्यों के लिए अत्यंत फल देने वाला कहा जाता है. वृषभ संक्रांति केवल एक पर्व नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का एक सुनहरा अवसर है. यदि इस दिन विधि-विधान से पूजा और दान किया जाए, तो व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग खुल सकता है.

शुभ मुहूर्त और योग का खास महत्व

वृषभ संक्रांति का पुण्य काल सुबह 5:30 बजे से 6:28 बजे तक रहेगा. शास्त्रों के अनुसार, इसी समय स्नान, दान और सूर्य उपासना करने से कई गुना पुण्य प्राप्त होता है. सर्वार्थ सिद्धि योग के कारण इस दिन किए गए कार्यों में सफलता मिलने की संभावना अधिक रहती है.

स्नान और पूजा से मिलेगा विशेष फल

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना बेहद जरूरी कहा गया है. स्नान के पानी में गंगाजल या काले तिल मिलाने से इसका पुण्य और बढ़ जाता है. साथ ही जीवन में सकारात्मकता आती है. स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल, लाल फूल, अक्षत, रोली और काले तिल डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें. ओम सूर्याय नमः मंत्र का जाप करें.

दान-पुण्य से बदल सकती है किस्मत

संक्रांति के दिन दान का विशेष महत्व होता है. इस दिन अन्न, वस्त्र, आम, तरबूज और छाता आदि का दान करना शुभ होगा. जिससे आर्थिक समस्याएं दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है.

ये उपाय सफलता और समृद्धि के लिए करें

इस दिन सूर्य चालीसा का पाठ करना भी अत्यंत लाभकारी होता है. इससे व्यापार, नौकरी और करियर में आ रही बाधाएं दूर होती है, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार संक्रांति के दिन सूर्य उपासना करने से व्यक्ति को मान-सम्मान, स्वास्थ्य और सफलता की प्राप्ति होती है.