कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा के पंचकूला जिले में अरबों रुपये की कीमत वाली करीब 1396 एकड़ बेशकीमती जमीन को लेकर 66 साल पुराने ऐतिहासिक भूमि विवाद में बड़ा मोड़ आ गया है। अंबाला मंडल के कमिश्नर संजीव वर्मा ने मामले में अहम आदेश जारी करते हुए राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े पुराने फैसले को रद्द कर दिया है। अब इस बहुचर्चित जमीन के मालिकाना हक को लेकर सभी पक्षों की मौजूदगी में नए सिरे से सुनवाई होगी।
यह विवाद 1960 के दशक से चला आ रहा है और कई पीढ़ियां इस जमीन के मालिकाना हक को लेकर कोर्ट-कचहरी के चक्कर काट रही हैं। मामला दिवंगत सरदार भगवंत सिंह की विशाल संपत्ति से जुड़ा है, जिनके पास पंचकूला क्षेत्र के सात प्रमुख गांवों—बरवाला, संगराना, फतेहपुर विरान, भराली, जलौली, बीर बाबूपुर और बीर फिरोजारी—में करीब 1396 एकड़ जमीन थी। उनके निधन के बाद इस विशाल भूमि के अधिशेष (Surplus Land) हिस्से को लेकर कानूनी विवाद शुरू हुआ, जो समय के साथ और उलझता चला गया।
इस जमीन को सामरिक और आर्थिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसका बड़ा हिस्सा आईटीबीपी कैंप और नेशनल हाईवे (जीटी रोड) के आसपास स्थित है। यही वजह है कि इस मामले को पंचकूला के सबसे महंगे और संवेदनशील भूमि विवादों में गिना जाता है।
मामले में नया मोड़ तब आया, जब देहरादून निवासी आशा सिंह ने कलेक्टर एग्रेरियन पंचकूला के 4 जनवरी 2024 के आदेश को अंबाला कमिश्नर कोर्ट में चुनौती दी। कलेक्टर ने अपने 11 अप्रैल 2023 के एक फैसले को पलटते हुए राजस्व रिकॉर्ड में किए गए सुधारों को रद्द कर दिया था। सुनवाई के बाद कमिश्नर संजीव वर्मा ने पाया कि यह कार्रवाई पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप नहीं थी।
कमिश्नर ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि हाईकोर्ट द्वारा समय-समय पर दिए गए निर्देशों के बावजूद इतने संवेदनशील और अरबों रुपये के मामले को वर्षों तक लंबित रखना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। उन्होंने मामले में देरी पर नाराजगी जताते हुए इसे जल्द निपटाने की जरूरत बताई।
अपने अंतिम आदेश में कमिश्नर ने कलेक्टर एग्रेरियन पंचकूला को निर्देश दिए हैं कि हरियाणा सरकार, मूल मालिकों के वारिसों और वर्तमान में जमीन पर काबिज निजी पक्षों सहित सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाए। साथ ही पूरे विवाद की दो महीने के भीतर नए सिरे से गहन जांच कर निष्पक्ष और अंतिम फैसला सुनाया जाए।
करीब छह दशक से चले आ रहे इस हाई-प्रोफाइल भूमि विवाद में कमिश्नर के आदेश के बाद अब चर्चाएं तेज हो गई हैं कि पंचकूला की इस ‘सोने की जमीन’ के असली मालिकाना हक पर जल्द बड़ा फैसला सामने आ सकता है।

