चंडीगढ़। Saraswati Statue : हरियाणा सरस्वती हेरिटेज विकास बोर्ड ने 11वीं सदी की मां सरस्वती की प्राचीन प्रतिमा को लंदन के ब्रिटिश म्यूज़ियम से भारत वापस लाने की मुहिम तेज कर दी है। बोर्ड का कहना है कि यह प्रतिमा मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला मंदिर की धरोहर है, जिसे अंग्रेजी शासन के दौरान भारत से इंग्लैंड ले जाया गया था।
बोर्ड के डिप्टी चेयरमैन धूमन सिंह किरमच ने बताया कि यह प्रतिमा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनका कहना है कि इस धरोहर को वापस लाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार से संपर्क किया गया है। साथ ही हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को भी पूरे मामले की जानकारी दी गई है।
उन्होंने बताया कि हाल ही में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने भोजशाला परिसर को प्राचीन सरस्वती वाग्देवी मंदिर मानते हुए हिंदू समाज को पूजा का अधिकार देने से जुड़े महत्वपूर्ण आदेश दिए हैं। इसके बाद इस प्रतिमा की वापसी की मांग को और मजबूती मिली है।
बोर्ड का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत सरकार ने विदेशों से कई प्राचीन मूर्तियां और ऐतिहासिक कलाकृतियां वापस मंगाई हैं। इसी तरह मां सरस्वती की इस प्रतिमा को भी भारत लाने का प्रयास किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, यह प्रतिमा परमार राजवंश के समय की मानी जाती है और संगमरमर से बनी है। इसमें संस्कृत और देवनागरी लिपि में शिलालेख भी अंकित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रतिमा भारत लौटती है, तो इन शिलालेखों पर शोध के जरिए प्राचीन भारतीय इतिहास, सरस्वती सभ्यता और उस समय की संस्कृति से जुड़ी नई जानकारियां सामने आ सकती हैं।
हरियाणा सरस्वती हेरिटेज विकास बोर्ड का उद्देश्य प्रतिमा को भारत लाकर पहले सरस्वती सभ्यता से जुड़े क्षेत्रों में प्रदर्शित करना और बाद में हरियाणा में प्रस्तावित सरस्वती संग्रहालय में स्थापित करना है। बोर्ड ने केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों से इस दिशा में आवश्यक कदम उठाने की अपील भी की है।
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