अनिल सक्सेना, रायसेन। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले की बेगमगंज पुलिस ने एक शातिर साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर खुद को पुलिस अधिकारी बताकर ठगी कर रहा था। मामला उस समय सामने आया जब ग्राम बिजौरा निवासी एक व्यक्ति ने अपनी गुमशुदा बेटी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। ऑनलाइन उपलब्ध रिपोर्ट से मोबाइल नंबर हासिल कर ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर बेटी को तलाशने का झांसा दिया और पैसे ऐंठ लिए। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए निवाड़ी जिले से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया है।

बेगमगंज के ग्राम बिजौरा निवासी नरेश लोधी ने अपनी बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट थाना बेगमगंज में दर्ज कराई थी। इसी रिपोर्ट का फायदा उठाकर साइबर ठगों ने फरियादी का मोबाइल नंबर हासिल किया और पुलिस अधिकारी बनकर फोन किया। आरोपियों ने बेटी को खोज निकालने का दावा करते हुए पहले 2 हजार रुपये की मांग की। फरियादी ने भरोसा कर पैसे ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद आरोपियों ने 5 हजार रुपये और मांग लिए, तब फरियादी को ठगी का अहसास हुआ और उसने पुलिस से शिकायत की।

शिकायत के आधार पर बेगमगंज थाने में अपराध क्रमांक 256/2026 धारा 318(4) और 319(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस अधीक्षक आशुतोष गुप्ता, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दीपक नायक और एसडीओपी सोनाली गुप्ता के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी राजीव उईके ने विशेष टीम गठित कर साइबर ठगों की तलाश शुरू की।

पुलिस की टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और साइबर जांच के आधार पर पुलिस टीम निवाड़ी जिले के पृथ्वीपुर पहुंची, जहां से दो आरोपियों पुष्पेंद्र पाल (25) निवासी ग्राम मनेथ और अखिलेश यादव (38) निवासी ग्राम गोवापूर्वी को गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि दोनों आरोपी फोन पर खुद को पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को झांसे में लेते थे और क्यूआर कोड भेजकर रकम अपने खातों में ट्रांसफर कराते थे। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है। मामले की विवेचना जारी है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर न करें और पुलिस अधिकारी बनकर पैसे मांगने वालों की तत्काल सूचना पुलिस को दें।

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