Dharm Desk – देश में कुछ स्थान ऐसे होते हैं, जो अपने आप में रहस्य, चमत्कार और अनोखी परंपराओं का संगम हैं। बिहार के औरंगाबाद जिले में स्थित सूर्य मंदिर भी ऐसा ही एक अद्भुत धाम है। जिधर सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था अटूट बनी हुई है। यह मंदिर न केवल अपनी प्राचीनता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसकी विशेष संरचना और धार्मिक महत्व इसे देश के मंदिरों से अलग पचाहन दिलाती है।

सूर्य की उपासना का एक प्रमुख केंद्र

त्रेतायुग के इस मंदिर का इतिहास बेहद प्राचीन और गौरव शाली बताया जाता है। हर साल चैत्र और कार्तिक माह में यहां छठ महापर्व के दौरान लाखों श्रद्धालु यहां जुटते हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय घाटों पर उमड़ती भीड़ इस मंदिर की लोकप्रियता का प्रमाण है।

इस मंदिर की सबसे अनोखी बात

जहां देश के अधिकांश मंदिर पूर्वाभिमुख होते हैं, वहीं देव सूर्य मंदिर पश्चिमाभिमुख है। यही वजह है कि यहां अस्त होते सूर्य की पूजा विशेष रूप से की जाती है, जो इसे और भी खाश बनाती है। मंदिर की स्थापत्य कला भी देखने की है। काले और भूरे पत्थरों से बना मंदिर, पत्थरों को विभिन्न आकारों में काट कर इतनी खूबसूरती से जोड़ा गया, कि यह कला का अद्भुत नमूना बन गया है।

मंदिर परिसर में सूर्य देव की तीन अवस्थाओं बुधमन है- उदयाचल, मध्याचल और अस्ताचल…की प्रतिमाएं स्थापित है, साथ ही यहां शिव-पार्वती की दुर्लभ प्रतिमा भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। करीब 100 फीट ऊंचा यह मंदिर दो मुख्य भागों में विभाजित है। गर्भगृह और मुखमंडप। गर्भगृह के ऊपर कमल के आकार का शिखर और उस पर स्वर्ण कलश इकीस भव्यता को और बढ़ाता है।

भगवान विश्वकर्मा ने स्वयं बनाया था

मंदिर के निर्माण को लेकर यह भी मान्यता है कि इसे भगवान विश्वकर्मा ने स्वयं बनाया था। वहीं, मंदिर परिसर में लगे शिला लेख इसे बेहद प्राचीन काल का बताता है। जिससे इसकी ऐतिहासिक महत्ता और भी बढ़ जाती है।

कैसे पहुंचें देव सूर्य मंदिर तक

देव सूर्य मंदिर बिहार के औरंगाबाद जिले के देव नगर में स्थित है। यहां पहुंचना काफी आसान है।

  1. रेल मार्ग: नजदीकी रेलवे स्टेशन औरंगाबाद और गया है, जहां से सड़क मार्ग द्वारा मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।
  2. सड़क मार्ग: पटना, गया और वाराणसी जैसे शहरों से बस और टैक्सी की सुविधा उपलब्ध है।
  3. हवाई मार्ग: सबसे नजदीकी एयरपोर्ट गया है, जहां से लगभग 90 किमी की दूरी तय कर मंदिर पहुंचा जा सकता है।