Dharm Desk – शनिवार 16 मई को ज्येष्ठ अमावस्या के साथ शनि जयंती का अद्भुत और दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसे शनिश्चरी अमावस्या कहा जाता है. यह खास योग करीब 13 साल बाद बना है. जिससे इसका धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व कई गुना बढ़ गया है. यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए राहत भरा माना जा रहा है, जो शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से प्रभावित हैं.

शनि पीड़ा से यह राशि है प्रभावित

इस समय कुंभ, मीन और मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है. कुंभ राशि पर अंतिम चरण होने से पुराने कर्मों का फल मिल सकता है. जो राहत के संकेत मिलते है. मीन राशि पर दूसरा चरण सबसे प्रभावशाली माना जाता है. जिसमें मानसिक और आर्थिक दबाव बढ़ सकता है. वहीं मेष राशि पर पहला चरण शुरू हुआ है. जिससे जीवन में बदलाव और नई जिम्मेदारियां बढ़ती हैं.

ढैय्या वालों के लिए सावधानी और अवसर दोनों

वर्तमान में सिंह और धनु राशि पर शनि की ढैय्या चल रही है. इस दौरान करियर, धन और पारिवारिक जीवन में चुनौतियां आ सकती हैं. लेकिन यह समय व्यक्ति को मजबूत और अनुशासित भी बनाता है. सही प्रयास और धैर्य से सकारात्मक परिणाम भी मिल सकते हैं.

इन राशियों के लिए शुभ संकेत

इस बार शनि जयंती मिथुन, कुंभ और मीन राशि के लिए शुभ फल, लाभ देने वाली रहेगी. इन राशियों के जातकों को करियर में उन्नति, नौकरी में लाभ और रुके हुए कार्यों में सफलता मिलने के योग बन रहे हैं.

क्यों खास है शनि जयंती का दिन

शनिदेव न्याय के देवता हैं और व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते है. ऐसे में इस दिन पूजा के साथ-साथ अच्छे कर्म करना भी जरूरी होता है. दान, सेवा और संयम से शनि दोष कम होने की मान्यता है.

शनि जयंती पर करें ये असरदार उपाय

1.पीपल के नीचे दीपक जलाएं – शाम के समय सरसों के तेल का दीपक जलाकर ओम शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप करें.

2.काले तिल और तेल का दान करें – काला तिल, काली उड़द, काला वस्त्र और तेल का दान करने से शनि कृपा मिलती है.

3.हनुमान जी की पूजा करें – हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करने से शनि का प्रभाव कम होता है.

4.शनि मंत्र का जाप करें – ओम प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः मंत्र का 108 बार जाप लाभकारी है.

5.छाया दान और सेवा करें – जरूरतमंदों को भोजन कराना, तेल का दान करना और सेवा भाव रखना विशेष फल देगा.