भारत द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty-IWT) को निलंबित किए जाने के फैसले पर पाकिस्तान की ओर से लगातार तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। अब पाकिस्तान की सीनेटर और पूर्व जलवायु मंत्री शेरी रहमान ने भारत पर “हाइड्रो वॉर” (जल युद्ध) छेड़ने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि भारत बांधों, जल प्रवाह में बदलाव, डेटा साझा न करने और एकतरफा फैसलों के जरिए पाकिस्तान पर दबाव बना रहा है।
‘सिंधु जल संधि एक ऐतिहासिक समझौता’
जियो टीवी में प्रकाशित अपने लेख ‘India’s Hydro War on Pakistan – Part 1’ में शेरी रहमान ने सिंधु जल संधि को दुनिया के सबसे सफल सीमा-पार जल समझौतों में से एक बताया। उनके अनुसार, संधि के तहत रावी, ब्यास और सतलुज भारत तथा सिंधु, झेलम और चिनाब पाकिस्तान को आवंटित की गई थीं। उन्होंने दावा किया कि संधि में किसी एक पक्ष के लिए इसे एकतरफा निलंबित या समाप्त करने का प्रावधान नहीं है।
भारत की परियोजनाओं पर उठाए सवाल
शेरी रहमान ने आरोप लगाया कि भारत पश्चिमी नदियों पर कई जलविद्युत परियोजनाओं के जरिए संधि की भावना का उल्लंघन कर रहा है। उन्होंने किशनगंगा, रातले, पाकल दुल, किरू, क्वार और सावलकोट जैसी परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पाकिस्तान पहले ही इन मामलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठा चुका है। उनका आरोप है कि भारत बिना पर्याप्त जानकारी साझा किए और आपसी परामर्श के बिना परियोजनाओं को आगे बढ़ा रहा है।
डेटा साझा नहीं करने और जल प्रवाह रोकने का आरोप
रहमान ने यह भी दावा किया कि अप्रैल 2025 के बाद से भारत ने चिनाब नदी के जल प्रवाह संबंधी आंकड़े साझा नहीं किए। उनके मुताबिक, बगलिहार और सलाल परियोजनाओं के संचालन के दौरान जल प्रवाह में अचानक बदलाव देखने को मिले, जिससे पाकिस्तान ने कई बार आपत्ति दर्ज कराई, लेकिन भारत की ओर से कोई जवाब नहीं मिला।
भारतीय नेताओं के बयानों पर भी आपत्ति
लेख में शेरी रहमान ने भारत के कुछ मंत्रियों के सार्वजनिक बयानों का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान तक पानी न पहुंचने देने जैसी घोषणाएं क्षेत्रीय तनाव बढ़ा सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की बयानबाजी जल विवाद को और गंभीर बना रही है।
पाकिस्तान का दावा, भारत ने संधि की भावना को चुनौती दी
अपने लेख के अंत में शेरी रहमान ने कहा कि सिंधु जल संधि किसी एक देश की ओर से दी गई रियायत नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच हुआ बाध्यकारी समझौता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत के हालिया कदम केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय जल समझौता ढांचे के लिए चुनौती हैं।
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