Dharm Desk- 17 मई से अधिक मास की शुरुआत हो चुकी है, जो 15 जून तक रहेगा. इस एक महीने के दौरान धार्मिक रूप से लोगों को अपनी दिनचर्या बदलने की जरूरत है, ऐसे में सवाल यह है कि इस पूरे समय में क्या करना चाहिए. किन कामों से दूरी बनानी चाहिए.

क्या करें?
- अधिक मास के दौरान भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने का विधान है. रोज सुबह स्नान के बाद पूजा करन. पीले फूल, तुलसी दल और पंचामृत अर्पित करना, आम तौर पर अपनाया जाता है. कई लोग सत्यनारायण व्रत कथा का पाठ या श्रवण भी करते हैं.
- इस दौरान मंत्र जाप और धार्मिक ग्रंथों का पाठ भी बढ़ जाता है. ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप, गीता, रामचरितमानस और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से लोगों को मानसिक शांति और एकाग्रता मिलती है.
- दान-पुण्य भी इस महीने का महत्वपूर्ण हिस्सा है. जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, पीली वस्तुएं और धन का दान किया जाता है. साथ ही सात्विक जीवन अपनाने पर जोर दिया जाता है. जिसमें सादा भोजन, संयमित व्यवहार और सकारात्मक सोच शामिल है.
- भजन-कीर्तन, सत्संग और व्रत रखने की परंपरा भी इस दौरान देखने करनी चाहिए. कई जगहों पर सामूहिक धार्मिक आयोजन होते है। जिनमें लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं.
क्या न करें?
- अधिक मास के दौरान कुछ कार्यों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है. विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और नए व्यापार की शुरुआत जैसे मांगलिक कार्य आमतौर पर इस समय टाल ही बेहतर होता है.
- खान-पान में भी सावधानी रखने की जरूरत होती है. मांसाहार, शराब और नशीले पदार्थों से दूर रहना इस अवधि में जरूरी माना जाता है.
- इसके अलावा व्यवहार में संयम रखना भी अहम होता है. किसी का अपमान करना, कटु वचन बोलना या विवाद में पड़ना टालना चाहिए. साथ ही छल-कपट, झूठ और अनैतिक कार्यों से दूरी बनाए रखने पर जोर दिया जाता है.
- इस तरह अधिक मास का यह एक महीना लोगों के लिए अपनी आदतों, सोच और दिनचर्या को संतुलित करने का समय होता है. जिसमें वे अनुशासन और सकारात्मकता की ओर ध्यान केंद्रित करते है.

