अमित पांडेय, खैरागढ़। कलेक्टर कार्यालय परिसर स्थित जिला आबकारी कार्यालय में कर्मचारियों के शराब सेवन का वीडियो सामने आया था। इस मामले को लल्लूराम डॉट कॉम ने प्रमुखता से उठाया, जिसके बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की। खबर लगने के कुछ घंटों के भीतर ही आबकारी विभाग के सहायक ग्रेड-3 सुजीत पुरी गोस्वामी और मुख्य लिपिक वीरेंद्र सिंह यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
गौरतलब है कि जिले के सबसे संवेदनशील प्रशासनिक परिसर से सामने आए इस वीडियो ने सरकारी कार्यालयों की कार्यसंस्कृति, अनुशासन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। सबसे अहम बात यह रही कि मामला उसी आबकारी विभाग से जुड़ा था, जिसकी जिम्मेदारी शराब के विक्रय और नियमों के पालन की निगरानी करना है।

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निलंबन आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि सोशल मीडिया एवं समाचार माध्यमों में प्रसारित वीडियो और खबरों के अवलोकन के बाद प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि दोनों कर्मचारियों ने कार्यालयीन समय में अपने कक्ष में मद्यपान किया। इसे शासकीय सेवक के आचरण के प्रतिकूल, गंभीर अनुशासनहीनता तथा विभागीय मर्यादा के विरुद्ध माना गया है।
लोगों ने उठाई थी कड़ी कार्रवाई की मांग
मामला सामने आने के बाद जिलेभर में इसकी चर्चा शुरू हो गई थी और लोगों ने कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई थी। अब प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि कलेक्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण सरकारी परिसर में अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह पूरा घटनाक्रम एक बार फिर बताता है कि जनहित से जुड़े गंभीर मुद्दों को जब मीडिया मजबूती से उठाता है तो जवाबदेही तय होती है और प्रशासन को कार्रवाई के लिए आगे आना पड़ता है।
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