राजधानी दिल्ली की बहुप्रतीक्षित बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना (Barapullah Phase-3 Elevated Corridor Project) ने लंबे इंतजार के बाद एक अहम उपलब्धि हासिल कर ली है। करीब 11 वर्षों की देरी, कई चुनौतियों और लगातार बढ़ती समय सीमाओं के बाद अब इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण संरचनात्मक काम पूरा हो गया है। बारापुला फेज-3 परियोजना के तहत यमुना नदी पर अंतिम डेक स्लैब की ढलाई सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। इसके साथ ही यमुना के दोनों किनारों को जोड़ने वाला आखिरी लिंक भी तैयार हो गया है और परियोजना अब अंतिम चरण में पहुंच गई है।
यह महत्वाकांक्षी परियोजना वर्ष 2015 में शुरू हुई थी और इसे मूल रूप से 2017 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि, भूमि अधिग्रहण से जुड़े विवादों, विभिन्न विभागों से मंजूरियों में देरी, तकनीकी जटिलताओं और प्रशासनिक कारणों की वजह से काम लंबे समय तक प्रभावित रहा। देरी के चलते परियोजना की लागत में भी लगातार बढ़ोतरी हुई और यह दिल्ली की सबसे अधिक विलंबित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में शामिल हो गई। अब अंतिम डेक स्लैब का काम पूरा होने के बाद निर्माण एजेंसियों का फोकस बाकी बचे कार्यों को पूरा कर जल्द से जल्द कॉरिडोर को यातायात के लिए तैयार करने पर है।
बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना ने सोमवार को एक और अहम उपलब्धि हासिल की। परियोजना के यमुना हिस्से पर अंतिम डेक स्लैब की ढलाई पूरी होने के साथ ही इसका प्रमुख संरचनात्मक कार्य पूरा हो गया। अंतिम स्लैब की ढलाई में करीब 175 घन मीटर कंक्रीट का इस्तेमाल किया गया। इसके साथ ही पूरी परियोजना में अब तक लगभग 4.5 लाख घन मीटर कंक्रीट लगाया जा चुका है। यह परियोजना के बड़े पैमाने और इसमें इस्तेमाल हुई इंजीनियरिंग तकनीक को दर्शाता है। इस महत्वपूर्ण मौके पर दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री प्रवेश साहिब सिंह निर्माण स्थल पर पहुंचे। उन्होंने वहां वर्षों से इस परियोजना पर काम कर रहे श्रमिकों, इंजीनियरों और कर्मचारियों से मुलाकात की और उनके साथ रात्रिभोज किया। मंत्री ने श्रमिकों और तकनीकी टीम के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि इस उपलब्धि के पीछे वर्षों की मेहनत, लगन और टीमवर्क सबसे बड़ा आधार है। उन्होंने निर्माण कार्य में लगे कर्मचारियों का उत्साहवर्धन किया।
‘प्राथमिकता के साथ पूरा किया काम’
लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि यह सिर्फ एक स्लैब का काम पूरा होना नहीं है, बल्कि दिल्लीवासियों से किए गए एक महत्वपूर्ण वादे को पूरा करने की दिशा में निर्णायक कदम है। मंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक से लोग इस परियोजना के पूरा होने का इंतजार कर रहे थे। यमुना नदी पर अंतिम स्लैब का काम पूरा होने के साथ ही दोनों किनारों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण हिस्सा तैयार हो गया है, जो लंबे इंतजार के खत्म होने का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने बारापुला फेज-3 परियोजना को प्राथमिकता वाली योजनाओं में शामिल किया और इसकी प्रगति की लगातार निगरानी की। सरकार बनने के बाद अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वर्षों से लंबित इस परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।
मंत्री के मुताबिक, उन्होंने खुद कई बार निर्माण स्थल का दौरा किया, नियमित समीक्षा बैठकें कीं और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर परियोजना में आ रही बाधाओं को दूर करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि आज की उपलब्धि पूरी टीम की सामूहिक मेहनत का परिणाम है। प्रवेश साहिब सिंह ने परियोजना से जुड़े श्रमिकों और इंजीनियरों की सराहना करते हुए कहा कि इस उपलब्धि में उनकी भूमिका सबसे अहम रही है। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी, सर्दी और बारिश के बीच लगातार काम करने वाले श्रमिकों और हर तकनीकी चुनौती का समाधान निकालने वाले इंजीनियरों के प्रयासों से यह संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि उन दिल्लीवासियों की भी है, जिन्होंने वर्षों तक धैर्य बनाए रखा और परियोजना के पूरा होने की उम्मीद नहीं छोड़ी।
बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना के पूरा होने के बाद पूर्वी दिल्ली और दक्षिणी दिल्ली के बीच यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इस कॉरिडोर के शुरू होने से मयूर विहार, अक्षरधाम मंदिर और आसपास के इलाकों से सराय काले खां, एम्स दिल्ली और दक्षिणी दिल्ली के अन्य हिस्सों तक पहुंचना आसान हो जाएगा। इस एलिवेटेड कॉरिडोर से यात्रियों को अधिक सुगम और सिग्नल-फ्री यात्रा का लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा NH-24, DND फ्लाईवे, रिंग रोड और सराय काले खां जैसे प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक दबाव कम होने की संभावना है। यमुना किनारे सोमवार शाम का नजारा केवल एक निर्माण परियोजना की उपलब्धि नहीं था, बल्कि उन श्रमिकों के योगदान का सम्मान भी था जिन्होंने वर्षों की मेहनत से इस संरचना को तैयार किया। परियोजना से जुड़े मजदूर उसी पुल के पास मंत्री के साथ भोजन करते नजर आए, जिसे उन्होंने अपने श्रम से आकार दिया है। यह पल निर्माण कार्य में लगे हजारों श्रमिकों की भूमिका को रेखांकित करता है।
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