पश्चिम बंगाल में TMC इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है. हर दिन कोई न कोई कहानी सामने आ ही जाती है. पार्टी के दो हिस्सों में बंटने के बाद अब पार्टी फंड को लेकर खींचतान शुरू हो गयी है. फंड को बागी नेताओं के हाथों में जाने से बचाने के लिए अब कुछ कड़े कदम उठाए जा रहे है. पार्टी के भीतर मचे सत्ता संघर्ष के चलते कोषाध्यक्ष अरूप बिस्वास ने बैंक को पत्र लिखकर सभी लेनदेन रोकने की गुहार लगाई है.
अरूप बिस्वास ने HDFC बैंक को पत्र लिखकर पार्टी के खाते से वित्तीय लेनदेन रोकने की मांग की है. चुनाव में मिली करारी हार के बाद से भारी आंतरिक कलह से जूझ रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) का विवाद अब बैंक अकाउंट तक पहुंच गया है.
पार्टी के भीतर मचे विद्रोह के बाद अब ममता बनर्जी के गुट वालों को टीएमसी का बैंक बैलेंस सुरक्षित रखने की चिंता सताने लगी है. बगावत के बजे बिगुल के बीच हालात इतने बिगड़ गए हैं कि पार्टी के कोषाध्यक्ष अरूप बिस्वास ने आनन-फानन में बैंक को पत्र लिखकर खातों से लेनदेन पर रोक लगाने की मांग कर दी है.
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 876 करोड़ रुपये के भारी-भरकम फंड पर ग्रहण लग गया है. पार्टी के भीतर मचे सत्ता संघर्ष के चलते कोषाध्यक्ष अरूप बिस्वास ने बैंक को पत्र लिखकर सभी लेनदेन रोकने की गुहार लगाई है.
अरूप बिस्वास ने अपनी चिट्ठी में बैंक को लिखा है कि संगठन को कौन संभालेगा (नियंत्रण किसके हाथ में होगा), इसे लेकर अभी स्थिति साफ नहीं है. जब तक सबकुछ साफ-साफ पता नहीं चल जाता, तब तक इस खाते से किसी भी तरह के डेबिट लेनदेन (पैसे निकालने) या परिचालन निर्देशों में किसी भी बदलाव की अनुमति न दी जाए.
दूसरी ओर, तृणमूल सूत्रों का कहना है कि बिस्वास को चुनाव हारने के बाद 5 जून को ही पद से हटाकर सुभाषिश चक्रवर्ती को नया कोषाध्यक्ष नियुक्त किया जा चुका था, जिसके सात दिन बाद उन्होंने पूर्व पद का इस्तेमाल कर बैंक को यह पत्र भेजा.
टीएमसी का कहना है कि अरूप बिस्वास अब पार्टी के ट्रेजरर नहीं हैं. इसके बाद ट्रेजरर के पद को लेकर विवाद और बढ़ गया है. एक तरफ अरूप बिस्वास ने बैंक खातों के लेन-देन को रुकवाने के लिए कदम उठाया है, तो दूसरी तरफ पार्टी के बड़े नेताओं का कहना है कि अब ये जिम्मेदारी उनके पास नहीं हैं.
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