लवकुश बैरागी, आगर मालवा। राजनीति और प्रशासन की ईगो वॉर तो आपने बहुत देखी होगी लेकिन आगर मालवा जिले में जो हुआ, उसने विरोध प्रदर्शन का एक बिल्कुल नया और अनोखा चैप्टर लिख दिया है। यहां कलेक्टर साहिबा से मिलने पहुंचे जनप्रतिनिधियों को जब डेढ़ घंटे तक चेंबर के बाहर वेटिंग में बैठना पड़ा तो उनका पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। फिर क्या था? अंदर से बुलावा नहीं आया तो नेताओं ने भी अपना लेटर पैड निकाला और कलेक्टर के चेंबर के मैन पर चस्पा कर चलते बने। अब यह ‘लेटर पैड’ सोशल मीडिया से लेकर जिले के सियासी गलियारों में खूब सुर्खियां बटोर रहा है।
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आखिर किस बात पर छिड़ा है यह ‘सस्पेंस थ्रिलर’?
पूरा मामला किसी बड़े वीआईपी मुद्दे का नहीं बल्कि एक ‘बाबू’ के ट्रांसफर का है। दरअसल हाल ही में नलखेड़ा जनपद पंचायत में पदस्थ एक बाबू का तबादला बड़ोद जनपद पंचायत में कर दिया गया। अब नलखेड़ा जनपद के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों को यह फैसला रास नहीं आया। उन्हें अपने ‘चहेते’ बाबू की विदाई इतनी अखर गई कि वे सीधे कलेक्टर प्रीति यादव के दरबार में ट्रांसफर रुकवाने की गुहार लगाने पहुंच गए।
‘पर्ची’ अंदर गई, पर बुलावा नहीं आया!
जनप्रतिनिधि पूरे लाव-लश्कर के साथ कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। नियम के मुताबिक चेंबर के अंदर मुलाकात के लिए नाम की पर्ची भी भिजवाई गई। नेताओं को लगा था कि अभी बुलावा आएगा लेकिन अंदर कलेक्टर प्रीति यादव अपनी प्रशासनिक फाइलों को निपटाने में व्यस्त थीं।
टिक-टिक करती घड़ी के साथ 10 मिनट, आधा घंटा और देखते-देखते पूरा डेढ़ घंटा बीत गया। बाहर बैठे-बैठे जनप्रतिनिधियों का सब्र का बांध टूट गया। उन्हें लगा कि यह तो सीधे-सीधे जनप्रतिनिधियों की ‘अथॉरिटी’ को नजरअंदाज करना हुआ।

चेंबर का गेट बना ‘नोटिस बोर्ड’
जब नेताओं को समझ आ गया कि आज मैडम के चेंबर का दरवाजा आसानी से खुलने वाला नहीं है तो उन्होंने गुस्से में एक अनोखा फैसला लिया। उन्होंने अपनी नाराजगी और मांग को दर्ज करने के लिए कलेक्टर चेंबर के मुख्य दरवाजे को ही ‘नोटिस बोर्ड’ बना दिया। अपने लेटर पैड पर विरोध की इबारत लिखी, उसे गेट पर चिपकाया और वहां से वॉकआउट कर गए।

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आगे क्या होगा यह देखना दिलचस्प
अब देखना यह है कि गेट पर चिपके इस लेटर पैड को देखकर कलेक्टर साहिबा का पारा चढ़ता है या फिर बड़ोद भेजे गए बाबू की नलखेड़ा वापसी का रास्ता साफ होता है!

