लवकुश बैरागी, आगर मालवा। मध्य प्रदेश की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था और अफसरों की संवेदनहीनता की एक तस्वीर सामने आई है। यहां जिला अस्पताल के एक डॉक्टर की कथित गंभीर लापरवाही ने एक 10 साल की मासूम बच्ची की जान ले ली। इंसाफ के लिए दर-दर भटकने के बाद जब 3 महीने तक किसी भी आला अधिकारी ने पीड़ितों की चीख नहीं सुनी तो मजबूर होकर पूरा परिवार कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गया। परिजनों का गुस्सा इस कदर फूटा कि वे कलेक्टर से सीधे मुलाकात की मांग पर अड़ गए और उन्हें मनाने पहुंचे डिप्टी कलेक्टर को वापस लौटा दिया।
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‘शुरुआती जांच में ही खराब हो गई थी किडनी’… अहमदाबाद में तोड़ा दम
परिजनों का कहना है कि जिला अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर की घोर लापरवाही के कारण बच्ची की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। जब जिला अस्पताल से राहत नहीं मिली तो बदहवास परिजन मासूम को इलाज के लिए आनन-फानन में अहमदाबाद लेकर गए।
वहां के डॉक्टरों ने जो खुलासा किया उसने परिवार के पैरों तले जमीन खिसका दी। डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची की पहली जांच रिपोर्ट में ही उसकी किडनी खराब होने की बात साफ सामने आ चुकी थी, लेकिन यहां के डॉक्टर ने उसे नजरअंदाज किया। आखिरकार इलाज के दौरान उस 10 साल की मासूम ने दम तोड़ दिया।
3 महीने की अनदेखी… और कलेक्टर दफ्तर के बाहर धरना
मासूम की मौत के बाद से ही न्याय की आस में भटक रहा परिवार अब आर-पार के मूड में है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पिछले 3 महीनों से वे स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों से लेकर कलेक्टर तक के चक्कर काट रहे हैं लेकिन उनकी शिकायत पर कोई सुनवाई नहीं हुई।
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सुनवाई न होने से नाराज परिवार रविवार को कलेक्टर कार्यालय के बाहर करीब 2 घंटे से ज्यादा समय तक धरने पर बैठा रहा। मौके पर जब डिप्टी कलेक्टर धरना खत्म करवाने और समझाइश देने पहुंचे, तो गुस्साए परिजनों ने उनके आश्वासन को ठुकरा दिया और साफ कह दिया कि वे सिर्फ कलेक्टर प्रीति यादव से ही बात करेंगे। अफसर को वहां से बिना नतीजा वापस जाना पड़ा।
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