आगरा. उत्तर प्रदेश के आगरा में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था, लेकिन अंतिम संस्कार की तैयारी के दौरान उनके शरीर में हलचल महसूस हुई. इसके बाद परिजन आनन-फानन में उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां नौ दिन तक इलाज चला. हालांकि, जिंदगी और मौत के बीच चली इस जंग में आखिरकार रविवार को महिला ने दम तोड़ दिया.

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अंतिम संस्कार की तैयारी के बीच शरीर में हुई हलचल

मामला आगरा के थाना ट्रांस यमुना कॉलोनी क्षेत्र की श्री नगर कॉलोनी का है. यहां रहने वाले सुनील की मां शीला देवी लंबे समय से लीवर की बीमारी से परेशान थीं. अप्रैल महीने से उनका इलाज चल रहा था. हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें बदायूं में रहने वाले दूसरे बेटे के पास ले गए थे. इसके बाद उन्हें बरेली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. 30 जुलाई को परिजन उनका शव आगरा लेकर आए और अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी गई.

दामाद ने पैर छूते ही महसूस की हरकत

परिजनों के अनुसार, अंतिम संस्कार से पहले रिश्तेदार महिला के अंतिम दर्शन के लिए पहुंच रहे थे. इसी दौरान उनका दामाद पैर छूने के लिए आगे बढ़ा. तभी उसे महिला के पैर में हलचल महसूस हुई. दामाद ने तुरंत परिवार के अन्य सदस्यों को इसकी जानकारी दी. पहले तो सभी लोग हैरान रह गए, क्योंकि कुछ देर पहले तक घर में मातम का माहौल था. लेकिन जब शरीर में हलचल की पुष्टि हुई तो परिवार ने तुरंत इलाज कराने का फैसला लिया.

ICU में नौ दिन तक चली जिंदगी की जंग

बेटे सुनील और संदीप ने मां की हालत को देखते हुए उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया. डॉक्टरों ने उन्हें ICU में रखकर इलाज शुरू किया. परिवार ने मां की जिंदगी बचाने के लिए इलाज में पांच लाख रुपये से ज्यादा खर्च किए. परिजनों को उम्मीद थी कि शीला देवी की हालत में सुधार होगा और वह दोबारा स्वस्थ हो जाएंगी. परिवार लगातार उनकी सेहत पर नजर बनाए हुए था.

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उम्मीद टूटी, दोबारा छाया मातम

नौ दिन तक इलाज के बाद रविवार सुबह शीला देवी ने आखिरकार दम तोड़ दिया. महिला की मौत के बाद परिवार में फिर से मातम छा गया. इस पूरे मामले ने लोगों को हैरान कर दिया है. वहीं, विशेषज्ञों के अनुसार कई बार गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों में शरीर के कुछ संकेतों को लेकर भ्रम की स्थिति बन सकती है.