प्रयागराज। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आज प्रयागराज में विजन इंडिया कार्यक्रम में शामिल हुए। विजन इंडिया कार्यक्रम में ‘शिक्षा-परीक्षा- क्यों ध्वस्त हुई व्यवस्था‘ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अखिलेश यादव ने कहा कि शिक्षा बुनियाद है। जब किसी देश की शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली ध्वस्त हो जाती है तो युवाओं का भविष्य बर्बाद हो जाता है। शिक्षकों पर काम का अधिक बोझ, लगातार पेपर लीक, परीक्षाएं रद्द होने, बेरोजगारी बढ़ने से मानसिक तनाव बढ़ता है। जब परीक्षाएं नहीं हुई तो मानसिक तनाव के कारण बड़ी संख्या में लोगों ने आत्महत्या तक कर ली। जिससे परिवार के सामने संकट पैदा हुआ है। देखा जा रहा कि तमाम कोशिशों के बाद भी सरकारें पेपर लीक नहीं रोक पा रही है।
रोजगार नहीं दे पाए तो वह आपदा में बदल जाएगी
अखिलेश यादव ने कहा कि जब योग्यता की अनदेखी की जाती है तो देश की बड़ी आबादी की ताकत एक बड़ी आपदा बन जाती है। दस साल पहले जब हम कहते थे कि डेमोग्रेफिक डेविडेंट में हम बहुत आगे है। हमारे छात्रों में बहुत ऊर्जा है। लेकिन वही ताकत आपदा में बदलती जा रही है। बढ़ती आबादी के नौजवानों को अगर सही शिक्षा और रोजगार नहीं दे पाए तो वह आपदा में बदल जाएगी। छात्र उम्मीद खोते जा रहे हैं। आज बड़ा सवाल है कि देश कैसे आगे बढ़ेगा। सरकार ने केजी से लेकर पीजी तक पूरी शिक्षा व्यवस्था को बीमार कर दिया है। सरकार हजारों सरकारी स्कूलों को बंद कर रही है। विश्वविद्यालय संकीर्ण राजनीति का शिकार हो गए है।
अगर बेसिक शिक्षा ही समाप्त हो जाए, जिस तरह से नियुक्तियां हो रही उस पर प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं तो उम्मीद कहां बच रही है। समस्या का मूल भाजपा और उनके संगी साथियों का वर्चस्ववादी, रुढ़िवादी सोच में कई परतों के नीचे छिपा है। शिक्षा, शिक्षक, शिक्षार्थी व शैक्षिक व्यवस्था को राजनीतिक सत्ता बचाने के लिए गुप्त चाल बना दिया गया है। अगर इस तरह चाल चली जाएगी तो संकट पैदा हो जाएगा।
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शिक्षकों को तरह-तरह के कामों में लगा दिया
अखिलेश यादव ने कहा कि शिक्षकों को तरह-तरह के कामों में लगा दिया जाता है। तो कभी चारा इकट्ठा करने में ड्यूटी लगा दी जाती है। उनका मनोबल गिराने के लिए कभी पाठ्यक्रम बदलते है, कभी यूनिफार्म तो कभी परीक्षाओं में जातिवादी प्रश्न पूछे जाते है। जब परीक्षाओं को लेकर बड़ी-बड़ी कमेटियां बनायी जाती है तो जातिवादी प्रश्न कैसे पूछे जाते हैं? गांव का प्राइमरी स्कूल मर्जर के नाम पर बंद कर दिया जाता है, जरा उस छह साल की छोटी बच्ची के बारे में सोचिए जिसे पढ़ाई के लिए तीन किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।
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बच्चों के लिए भाजपा सरकार के पास पैसे नहीं
अखिलेश ने आगे कहा कि देश के बच्चों के लिए भाजपा सरकार के पास पैसे नहीं है, लेकिन अपने विज्ञापन के लिए खजाना खुला है। हर विभाग से बजट कटौती कर विज्ञापनों पर खर्च किया जाता है। अच्छी शिक्षा के लिए जितने बजट की सलाह दी गयी है, इस सरकार में शिक्षा का बजट उससे आधे से भी कम है, जो दर्शाता है कि आज शिक्षा की बदहाली के लिए कोई सोच काम नहीं कर रही है। जब बुनियादी शिक्षा के लिए बजट नहीं है तो रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए सोचना बे-मानी होगी। यह सरकार रिसर्च और डेवलपमेंट का बजट भी विज्ञापन पर खर्च कर रही है।
केजी से विश्वविद्यालय तक हर क्लास में संघर्ष करना पड़ता है। आधारभूत ढ़ांचे की कमी। कहीं कुर्सी मेज नहीं, कहीं कापी-किताब और कहीं मिड-डे-मील नहीं। कहीं लैब नहीं, खेल का मैदान बिल्डरों को बेंच दिया जाता है। फीस की कमी से लाखों बच्चे पढ़ाई छोड़ देते हैं। स्कूल का पाठ्यक्रम कुछ होता है, प्रवेश परीक्षाओं में सवाल कुछ और आते हैं, इसी गैप को भरने के लिए टयूशन और कोचिंग की जरूरत पड़ती है।

