लखनऊ. लोकसभा में शुक्रवार को 131वां संविधान संशोधन बिल यानि महिला आरक्षण संशोधन बिल 2026 (Women’s Reservation Amendment Bill 2026) गिर गया. पिछले 12 साल में मोदी सरकार को ये सबसे बड़ा झटका मिला है. बिल की वोटिंग में सदन के कुल 528 सदस्यों ने भाग लिया था. जहां बिल के पक्ष में मात्र 298 वोट जबकि विपक्ष में 230 वोट पड़े हैं. बता दें कि, कुल संख्या का दो तिहाई आंकड़ा न पार कर पाने के कारण बिल पास नहीं हो पाया. इसके बाद सरकार ने बाकी 2 और विधेयकों को भी वापस ले लिया. अब इसे लेकर बयानबाजी शुरू हो गई है. भाजपा एक ओर विपक्ष को महिला विरोधी बता रही है, तो वहीं विपक्ष भी भाजपा सरकार पर निशाना साध रहा है. इसी कड़ी में अखिलेश यादव ने बीजेपी सरकार पर हमला बोला है.
अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा कि ‘वो भाजपा क्या महिला की हिमायती बनती है, जिसकी सोच घोर पुरातनपंथी है. जो लोग परिवार को नकारते हैं, वो लोग दूसरी तरह से परिवार की धुरी मतलब महिला को भी नकारते हैं. जिन भाजपाइयों या उन जैसे दकियानूसी सोच वाले लोगों ने दसों साल पहले ये कहा हो कि नारी अभी इतनी सक्षम नहीं हुई है कि उसे आजादी दी जाए या अपने फैसले खुद लेने की छूट दी जाए, वो क्या महिला के बारे में बात करेंगे. जो आज भी तरह-तरह के मंचों का इस्तेमाल करके ये कह रहे हैं कि नारी घर के कामों-बच्चों में ही उलझी रहनी चाहिए, उस भाजपा से आज की युवती-नारी को कोई भी उम्मीद नहीं है. भाजपा जाए तो नारी खुलकर सांस ले पाए!’
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सीएम योगी का विपक्ष पर हमला
बात दें कि बिल गिराने के विरोध में सीएम योगी भी विपक्ष पर निशाना साध चुके हैं. उन्होंने कहा कि भारत के महान लोकतंत्र के इतिहास में एक काला अध्याय जुड़ गया. विपक्ष की ओर से ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (Nari Shakti Vandan Act) के लिए जरूरी संविधान संशोधन बिल को पारित न होने देना ‘भारत माता’ के सम्मान पर आघात है. देश की समूची मातृशक्ति के साथ धोखा है. उनके लोकतांत्रिक अधिकार का हरण है. कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडी गठबंधन ने अपनी नारी विरोधी मानसिकता को दर्शाया है.
देश की नारी शक्ति सब देख और समझ रही है. वह इस छल और अन्याय को याद रखेगी और समय आने पर इसका उत्तर भी देगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मातृशक्ति के सम्मान, गरिमा और अधिकारों की रक्षा और उनके सशक्तीकरण के लिए NDA गठबंधन के प्रयास निरंतर जारी रहेंगे.
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