पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता ज्योतिप्रिय मलिक ने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। मलिक ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने अपने फैसले की जानकारी पहले ही पार्टी नेतृत्व को दे दी थी।

ममता बनर्जी के लंबे समय से भरोसेमंद सहयोगी रहे मलिक ने कहा, “खराब स्वास्थ्य के कारण मेरे लिए पार्टी की जिम्मेदारियों का निर्वहन करना संभव नहीं है। इसलिए मैंने तृणमूल कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है।”

संगठनात्मक फेरबदल के बीच आया इस्तीफा

मलिक का इस्तीफा ऐसे समय में सामने आया है, जब हाल ही में तृणमूल कांग्रेस ने अपने संगठन में बड़ा फेरबदल किया था। पार्टी की पुनर्गठित कार्यसमिति में भी उन्हें शामिल किया गया था। हालांकि, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते उन्होंने जिम्मेदारियों से खुद को अलग करने का फैसला किया।

स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं का जिक्र

सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व को भेजे गए पत्र में मलिक ने अपनी बिगड़ती सेहत का उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि उनका ब्लड शुगर स्तर 350 तक पहुंच गया है और वह किडनी से जुड़ी जटिल समस्याओं से भी जूझ रहे हैं। ऐसे में सक्रिय राजनीति और संगठनात्मक दायित्वों का निर्वहन उनके लिए कठिन हो गया है।

राशन घोटाला मामले के बाद बढ़ीं मुश्किलें

ज्योतिप्रिय मलिक 2011 से 2021 तक पश्चिम बंगाल सरकार में खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री रहे थे। हालांकि, अक्टूबर 2023 में कथित राशन वितरण घोटाले के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा उनकी गिरफ्तारी के बाद उनके राजनीतिक करियर को बड़ा झटका लगा था। गिरफ्तारी के बाद मलिक ने कई बार स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला दिया था और हिरासत के दौरान उनकी कई बार मेडिकल जांच भी कराई गई थी।

राजनीतिक गलियारों में तेज हुई अटकलें

मलिक के इस्तीफे के बाद राज्य की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। टीएमसी की स्थापना के शुरुआती दौर से ही ममता बनर्जी के साथ जुड़े रहे मलिक को पार्टी के सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिना जाता है। ऐसे में उनके इस्तीफे को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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