नूंह जिले में विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर शक्ति वाहिनी टीम और प्रशासनिक अधिकारियों ने बाल श्रम के खिलाफ व्यापक जागरूकता अभियान चलाया। इस दौरान समाज से बच्चों को मजदूरी के बजाय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने और उनके अधिकारों की रक्षा करने की अपील की गई।

सोनू वर्मा, नूंह। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के खास अवसर पर एमडीडी ऑफ इंडिया शक्ति वाहिनी नूंह की टीम द्वारा पूरे जिले में एक व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य स्थानीय लोगों को बाल श्रम के गंभीर दुष्प्रभावों, मासूमों के अधिकारों और उनके जीवन में शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम के दौरान टीम के सदस्यों ने विभिन्न बाजारों, व्यस्त सार्वजनिक स्थानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों का दौरा किया। वहां उन्होंने आम जनता, अभिभावकों और दुकानदारों से सीधा संवाद स्थापित किया। टीम ने सभी से भावुक अपील करते हुए कहा कि 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से किसी भी रूप में मजदूरी न कराई जाए।

एसपी डॉ. अर्पित जैन का संदेश

नूंह के पुलिस अधीक्षक (एसपी) डॉ. अर्पित जैन ने जिला वासियों के नाम एक बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश जारी किया है। उन्होंने कहा कि बाल श्रम एक गंभीर सामाजिक अपराध है और इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रत्येक नागरिक की यह नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को मजदूरी के दलदल में धकेलने के बजाय उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और एक सुरक्षित वातावरण प्रदान करें। एसपी ने जनता से अपील की है कि यदि उन्हें जिले में कहीं भी बाल श्रम या मासूमों से काम कराने की जानकारी मिले, तो वे बिना किसी डर के तुरंत पुलिस और जिला प्रशासन को सूचित करें।

डीसी अखिल पिलानी की अपील

नूंह के जिला उपायुक्त (डीसी) अखिल पिलानी ने इस अभियान के तहत समाज के सभी वर्गों से भावुक अपील की है। डीसी ने कहा कि बच्चे ही हमारे देश का असली भविष्य हैं और उनकी नींव को मजबूत करना हम सभी का परम कर्तव्य है। मासूम बच्चों को कम उम्र में काम में झोंकने के बजाय उन्हें बेहतर शिक्षा, सुरक्षा और सर्वांगीण विकास के उचित अवसर उपलब्ध कराना पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आम जनता के सक्रिय सहयोग और जागरूकता से ही ‘बाल श्रम मुक्त नूंह’ का हमारा यह बड़ा सपना धरातल पर साकार हो सकेगा।

सीजेएम नेहा गुप्ता का संदेश

मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) एवं डालसा की सचिव नेहा गुप्ता ने बाल श्रम के कानूनी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ तौर पर सचेत किया कि देश का कानून बच्चों के अधिकारों की पूरी मुस्तैदी से रक्षा करता है। कानूनी प्रावधानों के अनुसार, 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी व्यावसायिक प्रतिष्ठान या दुकान पर श्रम कराना एक गंभीर दंडनीय अपराध है, जिसके लिए सख्त सजा का प्रावधान है। देश के हर नागरिक को बाल अधिकारों और इन कड़े कानूनी प्रावधानों की पूरी जानकारी होनी चाहिए, ताकि मासूमों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

बाल कल्याण समिति की अपील

नूंह की मानव तस्करी रोधी इकाई और बाल कल्याण समिति ने संयुक्त रूप से समाज को सतर्क रहने की चेतावनी दी है। समिति के प्रतिनिधियों ने बताया कि बाल श्रम और मानव तस्करी जैसी सामाजिक बुराइयां अक्सर गहरे रूप से एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं। यदि समाज में कहीं भी कोई बच्चा संदिग्ध परिस्थितियों में मजदूरी करता हुआ या घूमता हुआ दिखाई दे, तो इसकी सूचना तुरंत संबंधित चाइल्डलाइन या बाल कल्याण विभाग को दें। समाज की थोड़ी सी सतर्कता और जागरूकता ही इन मासूम बच्चों को शोषण से बचाकर उनका बचपन सुरक्षित रख सकती है।