आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए शुक्रवार का दिन राजनीतिक भूकंप जैसा रहा। राघव चड्डा समेत पार्टी के 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 ने एक साथ इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। जो सांसद बागी हुए उनमें राघव चड्ढा के अलावा संदीप पाठक और स्वाति मालीवाल जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
सूत्रों के मुताबिक, आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल को इन सांसदों की नाराजगी का आभास हो गया था। उन्होंने शुक्रवार शाम इन सभी बागी नेताओं को अपने आवास पर चर्चा के लिए बुलाया था। केजरीवाल ने सांसदों को आश्वासन दिया था कि यदि वे किसी कारण से पार्टी में खुश नहीं हैं, तो वे अभी इस्तीफा दे दें और पार्टी उन्हें अगले कार्यकाल में फिर से टिकट देने का वादा करती है। हालांकि, यह बैठक कभी नहीं हो पाई क्योंकि सांसदों ने मिलने से पहले ही अपने इस्तीफे और भाजपा में शामिल होने का ऐलान कर दिया।
किन सांसदों ने छोड़ा आप का साथ
पार्टी छोड़ने वाले सात सांसदों में राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल शामिल हैं। राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी अपने बुनियादी सिद्धांतों और मूल्यों से पूरी तरह भटक गई है। उन्होंने कहा, “जिस पार्टी को हमने अपने खून-पसीने से सींचा था, वह अब अपने ही आदर्शों को भूल चुकी है।”
कैसे बनी बगावत की रणनीति?
बताया जा रहा है कि सांसदों ने गुरुवार सुबह ही पार्टी छोड़ने का मन बना लिया था। बगावत की पहली चिंगारी तब भड़की जब राघव चड्ढा को राज्यसभा में उप-नेता के पद से हटाकर अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद चड्ढा ने अन्य नाराज सांसदों से संपर्क साधा और एक संयुक्त कदम उठाने का फैसला किया। संवैधानिक नियमों का हवाला देते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि दो-तिहाई सांसदों के साथ होने के कारण यह विलय पूरी तरह वैध है और इसके दस्तावेज राज्यसभा सभापति को सौंप दिए गए हैं।
संजय सिंह ने लगाया ‘ऑपरेशन लोटस’ का आरोप
भाजपा मुख्यालय में पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन ने सभी सांसदों का पारंपरिक मिठाइयों के साथ स्वागत किया। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी ने इसे भाजपा का ‘ऑपरेशन लोटस’ करार दिया है। AAP नेताओं का आरोप है कि भाजपा पंजाब में उनकी सरकार के अच्छे कामों को रोकने के लिए साजिश रच रही है और सांसदों की खरीद-फरोख्त कर रही है।
AAP के लिए अस्तित्व का संकट?
पंजाब और दिल्ली की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी के लिए यह संकट इसलिए भी बड़ा है क्योंकि राघव चड्ढा और संदीप पाठक जैसे नेता पार्टी की रणनीति और संगठन के मुख्य स्तंभ माने जाते थे। 14 साल के सफर में AAP के लिए यह सबसे कठिन समय है, जहां उसे अपने ही पुराने साथियों की बगावत का सामना करना पड़ रहा है।
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