नई दिल्ली. लोकसभा में ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पारित होने के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद अवधेश प्रसाद ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि केवल कानून बना देने से समस्याओं का समाधान नहीं होता, बल्कि उसकी प्रभावी क्रियान्वयन व्यवस्था और सरकार की नीयत सबसे अधिक मायने रखती है. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की छात्रों और युवाओं के प्रति मंशा ठीक नहीं है.
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‘कानून बनते रहे, लेकिन लागू नहीं हुए’
संसद परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान अवधेश प्रसाद ने कहा कि देश में पहले भी कई महत्वपूर्ण कानून बनाए गए, लेकिन उनका सही तरीके से पालन नहीं कराया गया. उन्होंने कहा कि किसी भी कानून की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसे लागू कराने की जिम्मेदारी किसके पास है और सत्ता में बैठी सरकार उसे लेकर कितनी गंभीर है.
भाजपा सरकार की नीयत पर उठाए सवाल
सपा सांसद ने कहा कि उन्हें अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि भाजपा सरकार की नीयत देश के छात्रों और युवाओं के हित में नहीं दिखती. उन्होंने आरोप लगाया कि यदि सरकार वास्तव में छात्रों के भविष्य को लेकर गंभीर होती तो परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों और पेपर लीक की घटनाओं पर पहले ही प्रभावी नियंत्रण किया जाता. उनके अनुसार, केवल सख्त कानून बना देने से तब तक कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा, जब तक उसे ईमानदारी से लागू नहीं किया जाता.
पेपर लीक पर सख्ती के लिए आया नया कानून
गौरतलब है कि संसद ने ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पारित किया है. सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल माफिया और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी पर कड़ी रोक लगाना है. इसके तहत दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान किया गया है.
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राजनीतिक बयानबाजी तेज
पेपर लीक जैसे संवेदनशील मुद्दे पर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. जहां केंद्र सरकार इसे युवाओं के हित में बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष सरकार की मंशा और कानून के क्रियान्वयन पर सवाल उठा रहा है. आने वाले समय में यह देखना होगा कि नया कानून परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता लाने में कितना प्रभावी साबित होता है.


