प्रदीप मालवीय, उज्जैन। श्रावण माह के तीसरे सोमवार पर आज राजाधिराज बाबा महाकाल की तीसरी सवारी बड़ी ही धूमधाम से निकली । राजाधिराज बाबा महाकाल भी अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए निकले । सभामंडप में वैदिक मन्त्रोंच्चार के साथ पूजन के बाद बाबा महाकाल रजत पालकी में सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकले । शाम 4:00 बजे जैसे ही बाबा महाकाल रजत पालकी में सवार हुए वैसे ही पूरा मंदिर परिसर जय महाकाल के जयकारों के साथ गुंजायमान हो उठा ।
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सर्वप्रथम महाकाल द्वार पर बाबा महाकाल को सशस्त्र पुलिस बल की टुकड़ी द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया । इसके पश्चात नगर के विभिन्न मार्गो से होते हुए बाबा महाकाल की सवारी शिप्रा नदी के तट पर पहुंची जहां शिप्रा नदी के पूजन के पक्ष और महाकाल का शिप्रा के जल से अभिषेक किया गया । तत्पश्चात सवारी शहर के विभिन्न मार्गो से होते हुए पुनः अपने गंतव्य पर पहुंची । बाबा महाकाल की सवारी में सशस्त्र पुलिस बल के टुकड़ी, पुलिस बैंड, विभिन्न भजन मंडलियो के साथ ही भक्त झूमते – गाते चल रहे थे ।
सावन और भादवा के पवित्र महीनों में, हर सोमवार को महाकाल मंदिर के सभामंडप में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ बाबा के चंद्रमौलेश्वर स्वरूप का विधिवत पूजन होता है । कड़ाबीन की गूंज और पुलिस बैंड की धुन के बीच, बाबा महाकाल अपनी रजत पालकी में सवार होकर प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकलते हैं ।
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वही महाकाल की एक झलक पाने के लिए सड़कों के दोनों ओर भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है । कोई ताली बजाकर स्वागत करता है, तो कोई आंसुओं से बाबा के चरण धोता है । राजा और रंक का भेद मिटाकर, खुद देवाधिदेव महादेव अपनी प्रजा के बीच खिंचे चले आते है ।
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