सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों में उमर खालिद को जमानत न देने के अपने ही फैसले पर सवाल उठाए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को शीर्ष अदालत की एक अन्य डिवीजन बेंच द्वारा दिए गए उस फैसले पर गंभीर आपत्ति जताई, जिसमें दिल्ली दंगों के मामले में उमर खालिद को जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। अदालत ने कहा कि उमर खालिद को जमानत न देने के फैसले में सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बेंच के फैसले का पालन नहीं किया गया. सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि “बेल नियम है और जेल अपवाद”, और यह सिद्धांत UAPA जैसे कड़े कानूनों में भी लागू होता है.  

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अंद्राबी को जिस न्यायिक सिद्धांत के तहत जमानत दी जा रही है, उसे 3 जजों की बेंच ने तय किया था. उमर खालिद के मामले में दो जजों की बेंच ने उस सिद्धांत का पालन नहीं किया.

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (18 मई, 2026) को अपने उस फैसले पर नाराजगी जताई है, जिसमें 2020 के दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया गया था. कोर्ट ने नार्को-टेरर केस के आरोपी जम्मू कश्मीर के सैयद इफ्तेखार अंद्राबी को जमानत दी और खालिद और शरजील को जमानत नहीं दिए जाने पर असहमति जताई.

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने ये टिप्पणियां सैयद इफ्तिखार अंद्राबी की जमानत याचिका मंजूर करते हुए कीं। UAPA और NDPS एक्ट की धाराओं के तहत आरोपों का सामना कर रहे अंद्राबी को रिहा करते समय सुप्रीम कोर्ट ने बिना ट्रायल लंबे समय से जेल में रहने को आधार बनाया है.

अंद्राबी को जून 2020 में गिरफ्तार किया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा UAPA के मामलों में भी ‘बेल नियम है और जेल अपवाद’ का सिद्धांत लागू होता है. जनवरी महीने में कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया था, जबकि बाकी सभी आरोपियों को रिहा कर दिया गया था.

अदालत ने आगे कहा कि स्वतंत्रता का अधिकार केवल एक वैधानिक नारा नहीं, बल्कि एक संवैधानिक प्रावधान है। जिसका हर हाल में पालन किया जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने अपने जनवरी के उस फैसले पर भी आपत्ति जताई, जिसके तहत उमर खालिद और शरजील इमाम को एक साल तक जमानत मांगने से रोक दिया गया था।

जस्टिस उज्जल भुइंया ने फैसले में कहा, ‘कम सदस्यीय बेंच बड़ी बेंच की ओर से तय कानून से बंधी होती है. न्यायिक अनुशासन की मांग है कि बाध्यकारी मिसाल का पालन किया जाए और अगर कोई संदेह हो तो मामले को बड़ी बेंच को भेजा जाए. छोटी बेंच बड़ी बेंच के फैसले को दरिकनार, कमजोर या अनदेखा नहीं कर सकती है.’

सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने जनवरी में दिल्ली दंगों के आरोपियों गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को सशर्त जमानत दे दी थी, जबकि मामले के मुख्य आरोपियों उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गई थीं. दोनों सितंबर, 2020 से जेल में बंद हैं.

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