नीरज काकोटिया, बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में बच्चों की लगातार हो रही मौतों और स्वास्थ्य सुविधाओं में बदहाली को लेकर आदिवासी समाज का गुस्सा फूट पड़ा है। ताजा मामला मोहनपुर पंचायत के बैगाटोला का है, जहां मलेरिया से पीड़ित 5 वर्षीय मासूम लवकुश मरकाम की तड़के सुबह मौत हो गई। घटना से आक्रोशित आदिवासी समाज के लोगों ने स्वास्थ्य विभाग पर इलाज में लापरवाही का गंभीर आरोप लगाते हुए बालाघाट-बैहर मार्ग पर बंजारी तिराहे के पास जोरदार चक्काजाम कर दिया।
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जबरन अंतिम संस्कार का आरोप, हैदराबाद में हैं माता-पिता
ग्रामीणों और परिजनों ने स्थानीय प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि प्रशासन ने बच्चे का बिना पोस्टमार्टम कराए ही जबरन अंतिम संस्कार करवा दिया। मृतक मासूम लवकुश के माता-पिता रोजगार की तलाश में हैदराबाद गए हुए हैं, जिन्हें अपने बच्चे का अंतिम चेहरा देखना भी नसीब नहीं हुआ। परिजन और रिश्तेदार मासूम को अंतिम विदाई देने के लिए तरसते रह गए।
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जिले में पहले भी मलेरिया व कुपोषण से होती रही हैं मौतें
बालाघाट का बैहर और परसवाड़ा क्षेत्र लंबे समय से मलेरिया और मौसमी बीमारियों का गढ़ रहा है। इससे पहले भी बैगाटोला और आसपास की पंचायतों में समय पर इलाज, एंबुलेंस व दवाएं न मिलने के कारण आधा दर्जन से अधिक बैगा आदिवासियों और बच्चों की जान जा चुकी है। हर साल बारिश और ठंड के मौसम में स्वास्थ्य अमले की सुस्ती के चलते दूरदराज के आदिवासी अंचलों में समय पर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं पहुंच पातीं, जिसके कारण मासूम बच्चों को अपनी जान गंवानी पड़ती है।
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