पश्चिम बंगाल में शुभेंदु सरकार के द्वारा शुरू की गई ‘डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट’ की पॉलिसी के तहत घुसपैठियों के खिलाफ एकदम डोनाल्ड ट्रंप की तरह अभियान शुरू किया है. अधिकारी ने जिलाधिकारियों को निर्देश दे दिए हैं कि वे घुसपैठियों की पहचान करें और उन्हें वापस भेजने का इंतजाम करें. अब इस निति का असर साफ़ दिखने लगा है. स्टेट बॉर्डर के कई पॉइंट्स पर कथित तौर पर अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के बड़े-बड़े समूह इकट्ठा होने लगे हैं. उत्तरी 24 परगना और मालदा से सामने आ रहे दृश्यों से पता चलता है कि राज्य का घुसपैठ-रोधी अभियान अब सिर्फ सियासी बयानबाजी से आगे बढ़कर प्रशासनिक कार्रवाई का रूप ले चुका है.

उत्तरी 24 परगना के बशीरहाट सब-डिवीजन में स्थित हकीमपुर चेकपॉइंट पर, मंगलवार सुबह सौ से ज्यादा बांग्लादेशी पुरुष और महिलाएं इकट्ठा हुए. ये सभी अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके वापस अपने देश लौटना चाहते थे. बता दें कि घुसपैठियों को वापस भेजना बीजेपी के चुनावी घोषणापत्र में शामिल था.

कथित तौर पर इनमें से कई लोग पश्चिम बंगाल के अलग-अलग इलाकों में अवैध रूप से रह रहे थे. विदेशी नागरिकों को देश से निकालने और उनके लिए होल्डिंग सेंटर बनाने के संबंध में सरकार की हालिया घोषणाओं के बाद वे चेकपॉइंट पर पहुंचे. सीमा पर यह भीड़ मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के उस ऐलान के कुछ ही दिनों बाद देखने को मिली, जिसमें उन्होंने कहा था कि राज्य घुसपैठियों के खिलाफ ‘डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट’ की पॉलिसी अपनाएगा.

अधिकारियों को दिए गए निर्देश

पश्चिम बंगाल के गृह और पहाड़ी मामलों के विभाग की विदेशी शाखा द्वारा 23 मई को जारी आदेश में जिलाधिकारियों को ”गिरफ्तार किए गए विदेशियों” और ”रिहा किए गए विदेशी कैदियों” को तब तक निरुद्ध रखने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए कहा गया, जब तक कि निर्वासन की औपचारिकताएं पूरी नहीं हो जातीं.

जो सीएए के दायरे से बाहर, उन सभी कर एक्शन

बीएसएफ के सीनियर अधिकारियों के साथ हाल ही में हुई एक मीटिंग में बोलते हुए, सीएम शुभेंदु ने कहा कि जो लोग नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के दायरे से बाहर हैं, उन्हें अवैध घुसपैठिया माना जाएगा. उन्हें पुलिस गिरफ्तार करके बीएसएफ को सौंप देगी.

इसके साथ ही, राज्य सरकार ने जिलों में होल्डिंग सेंटर बनाने की पहल शुरू कर दी है, जिससे संदिग्ध अवैध प्रवासियों को कुछ वक्त के लिए वहां रखा जा सके और उन विदेशी कैदियों को रिहा किया जा सके, जो देश-निकाला या अपने देश वापसी का इंतजार कर रहे हैं.

नौ संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को रखा गया

इंग्लिश बाजार शहर के चंदन पार्क में स्थित यह जगह फिलहाल जिले का एकमात्र होल्डिंग सेंटर है और इसमें पहले ही नौ संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को रखा जा चुका है, जिनमें तीन महिलाएं और छह नाबालिग शामिल हैं. इन हिरासत में लिए गए लोगों को गजोल पुलिस स्टेशन के तहत पांडुआ में पकड़ा गया था, जिसके बाद रविवार को उन्हें इस सेंटर में शिफ्ट कर दिया गया.

इस केंद्र पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम हैं. यहां 24 घंटे निगरानी और रखरखाव के लिए CCTV सर्विलांस के साथ-साथ 12 पुलिसकर्मियों, सिविल डिफेंस स्टाफ, नागरिक स्वयंसेवकों और सहायक कर्मचारियों को तैनात किया गया है.

30 दिनों तक हिरासत में रखा जा सकता है

इस फ्रेमवर्क के तहत, जिन लोगों पर अवैध रूप से देश में घुसने का शक है, उन्हें 30 दिनों तक हिरासत में रखा जा सकता है. इस दौरान, जिला मजिस्ट्रेट और तय अधिकारी उनकी पहचान की जांच करते हैं, बायोमेट्रिक जानकारी इकट्ठा करते हैं, और उन्हें वापस भेजने से पहले उनका रिकॉर्ड सेंट्रल डेटाबेस में अपलोड करते हैं.