Bastar News Update : जगदलपुर। बस्तर मुख्यालय की केंद्रीय जेल अब सिर्फ बंदियों को रखने का स्थान नहीं, बल्कि सुधार और पुनर्वास का मॉडल बनकर उभरी है। जेल को अंतरराष्ट्रीय मानक का आईएसओ 9001:2015 प्रमाणन मिला है। यह सम्मान सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और बेहतर प्रबंधन के आधार पर प्रदान किया गया। कड़े मूल्यांकन के बाद जेल की व्यवस्थाओं को गुणवत्ता मानकों पर खरा पाया गया। बंदियों के कौशल विकास और शिक्षा कार्यक्रमों को भी सराहा गया। स्वच्छता और मानवाधिकार संरक्षण के प्रयासों को विशेष महत्व मिला।

narayana

जेल प्रशासन की पारदर्शी कार्यप्रणाली इस उपलब्धि की बड़ी वजह बनी। प्रबंधन व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय स्तर की मान्यता मिलने से नई पहचान मिली है। यह उपलब्धि सुधारात्मक न्याय व्यवस्था को मजबूती देने वाली मानी जा रही है। बंदियों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे प्रयास सफल साबित हुए हैं। जेल प्रशासन ने इसे पूरी टीम के सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया है। अब केंद्रीय जेल जगदलपुर प्रदेश में सुधारात्मक मॉडल के रूप में नई पहचान बना रही है।

बस किराए पर बढ़ा विवाद, यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ

बस्तर। रायपुर-जगदलपुर मार्ग पर बस किराए में बढ़ोतरी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार की मंजूरी के बिना किराया बढ़ाए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। कुछ निजी बस संचालकों ने आपसी निर्णय से किराया बढ़ा दिया है। इसका सीधा असर लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों पर पड़ा है।

यात्रियों को पहले की तुलना में अधिक राशि चुकानी पड़ रही है। बैलाडीला, किरंदुल, सुकमा और बीजापुर रूट के यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा है। कम दूरी के यात्रियों से भी बढ़े हुए किराए की वसूली किए जाने की शिकायत है। यात्रियों ने इसे मनमानी बताते हुए विरोध दर्ज कराया है। परिवहन विभाग द्वारा कार्रवाई नहीं होने से सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय बस संचालकों ने भी बड़े ऑपरेटरों के फैसले पर नाराजगी जताई है। किराया वृद्धि को लेकर स्पष्ट सरकारी आदेश का इंतजार किया जा रहा है। फिलहाल यात्रियों और बस संचालकों के बीच किराए का मुद्दा चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

प्रवेशोत्सव के बीच 8 लापरवाह शिक्षकों को शो-कॉज नोटिस जारी

जगदलपुर। शैक्षणिक सत्र के प्रथम दिवस पर बस्तर जिले के स्कूलों में एक तरफ जहाँ बच्चों के स्वागत की उत्सुकता दिखी, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक कसावट का कड़ा रुख भी सामने आया। नया सत्र शुरू होने के अवसर पर जिला मिशन समन्वयक अशोक पाण्डे एवं सहायक कार्यक्रम अधिकारी परमेश्वर पाण्डे द्वारा विकासखण्ड तोकापाल, लोहण्डीगुडा एवं बस्तर के विद्यालयों का सघन निरीक्षण किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य व्यवस्थाओं का जायजा लेना और बच्चों की उपस्थिति को प्रोत्साहित करना था। इस औचक निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि विद्यालयों में नया सत्र शुरू होने की खुशी में प्रवेशोत्सव बेहद हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया जा रहा था, जहां बच्चे नए उमंग के साथ अपनी कक्षाओं में पहुंचे थे। हालांकि इस उत्सव के माहौल के बीच कर्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों और समन्वयकों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की गई। निरीक्षण के दौरान अनुशासनहीनता पाए जाने पर विकासखण्ड बस्तर एवं तोकापाल में कार्यरत 08 लापरवाह शिक्षकों एवं संकुल समन्वयकों को तत्काल कारण बताओ सूचना पत्र जारी कर दिया गया। इन शिक्षकों के द्वारा यदि निर्धारित समयावधि में इन सभी की ओर से कोई संतोषप्रद जवाब प्राप्त नहीं होता है, तो ऐसी स्थिति में संबंधितों के विरुद्ध एक दिवस का वेतन कटौती करने की कार्यवाही की जाएगी।

इस प्रशासनिक कार्रवाई के साथ ही स्कूलों के सुचारू संचालन को लेकर व्यापक दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं। सभी विद्यालयों में मध्याह्न भोजन का नियमित और गुणवत्तापूर्ण संचालन किया जाए। इसके साथ ही शिक्षकों को अपनी डेली डायरी को प्राथमिकता के साथ अनिवार्य रूप से लिखने को कहा गया है, ताकि शैक्षणिक गतिविधियों का सही मूल्यांकन हो सके। सत्र के पहले ही दिन से एक अनुशासित माहौल बनाने के उद्देश्य से अधिकारियों ने समय पर बच्चों एवं शिक्षकों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने और उसे अनिवार्य रूप से ऑनलाइन दर्ज करने के कड़े निर्देश दिए हैं, ताकि पूरी व्यवस्था पारदर्शी बनी रहे।

जंगलों में नक्सली नेटवर्क को बड़ा झटका

सुकमा जिले में चलाए जा रहे सर्च अभियान के दौरान सुरक्षा बलों को अहम सफलता मिली है। मसपुर-गुडरापाल के जंगल क्षेत्र से हथियार और गोला-बारूद का डंप बरामद किया गया। बीएसएफ और सुरक्षा बल संयुक्त अभियान में क्षेत्र की तलाशी ले रहे थे। संदिग्ध स्थान की जांच के दौरान जमीन में छिपाकर रखी सामग्री मिली। बरामद सामान में बीजीएल लॉन्चर, बीजीएल गन और राइफल शामिल हैं। इसके अलावा बड़ी मात्रा में कारतूस और अन्य सामग्री भी जब्त की गई। प्रारंभिक जांच में इसे नक्सलियों का पुराना डंप माना जा रहा है। सुरक्षा बलों की लगातार दबाव रणनीति का असर अब दिखाई दे रहा है। सर्च अभियान के दौरान जंगल क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाई गई है। बरामदगी से नक्सलियों की संभावित गतिविधियों को झटका लगा है।।सुरक्षा एजेंसियां अब डंप से जुड़े अन्य सुरागों की जांच कर रही हैं। इलाके में अभियान आगे भी जारी रहने की बात कही गई है।

अवैध प्लॉटिंग पर चला बुलडोजर, भूमाफियाओं को सख्त संदेश

सुकमा। सुकमा प्रशासन ने अवैध कॉलोनियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई कर सख्त संदेश दिया है। कलेक्ट्रेट के पीछे स्थित कृषि भूमि पर विकसित की जा रही कॉलोनी को ध्वस्त किया गया। राजस्व और नगर पालिका की संयुक्त टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में अवैध निर्माण हटाए गए। जांच में भूमि उपयोग संबंधी नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई। भूमि को आवासीय उपयोग में बदलने की आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी। कॉलोनाइजर और नियोजन नियमों की अनदेखी किए जाने का मामला मिला। कार्रवाई से पहले संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए गए थे। समयसीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर प्रशासन सक्रिय हुआ। अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ इसे अब तक की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं होगी। आगे भी ऐसे मामलों पर सख्ती जारी रखने के संकेत दिए गए हैं।

पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग तेज

सुकमा। पत्रकार सुरक्षा कानून को लागू करने की मांग को लेकर जिले में आवाज बुलंद हुई है। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया से जुड़े पत्रकार एकजुट होकर धरने पर बैठे। जिला मुख्यालय में आयोजित प्रदर्शन के दौरान ज्ञापन भी सौंपा गया। पत्रकारों ने सुरक्षा और कानूनी संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना है कि निष्पक्ष पत्रकारिता के दौरान कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। हाल के वर्षों में पत्रकारों पर दबाव और शिकायतों की घटनाएं बढ़ी हैं। प्रदर्शनकारियों ने कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग उठाई। पत्रकारों का तर्क है कि सुरक्षा तंत्र मजबूत होने से स्वतंत्र पत्रकारिता को बल मिलेगा। धरने में बड़ी संख्या में मीडिया कर्मियों की भागीदारी रही। वक्ताओं ने लोकतंत्र में पत्रकारों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। ज्ञापन के माध्यम से सरकार तक अपनी मांग पहुंचाई गई। अब पत्रकार संगठन कानून के शीघ्र लागू होने की उम्मीद जता रहे हैं।

नए सत्र में शिक्षा व्यवस्था पर प्रशासन की सख्त नजर

बस्तर। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ प्रशासन ने स्कूलों में अनुशासन पर फोकस बढ़ा दिया है। औचक निरीक्षण के दौरान कई शिक्षक और संकुल समन्वयक अनुपस्थित या लापरवाह पाए गए। इसके बाद संबंधित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। समय पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर वेतन कटौती की कार्रवाई हो सकती है। अधिकारियों ने विद्यालयों की व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया। बच्चों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने पर विशेष जोर दिया गया है। मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता और नियमित संचालन की समीक्षा की गई। शिक्षकों को डेली डायरी अनिवार्य रूप से लिखने के निर्देश मिले हैं। प्रवेशोत्सव कार्यक्रमों में बच्चों का उत्साह भी देखने को मिला। निरीक्षण का उद्देश्य पढ़ाई के साथ जवाबदेही सुनिश्चित करना बताया गया। नए सत्र में प्रशासनिक कसावट और शैक्षणिक गुणवत्ता दोनों पर समान ध्यान दिया जा रहा है।

Lalluram.Com के व्हाट्सएप चैनल को Follow करना न भूलें.
https://whatsapp.com/channel/0029Va9ikmL6RGJ8hkYEFC2H