बीजापुर। बीजापुर के जंगलों में प्रकृति की गोद में एक ऐसा धार्मिक स्थल है, जिसका रहस्य आज भी लोगों को आकर्षित करता है। मद्देड़ के पास पोषड़पल्ली गांव से करीब 40 किलोमीटर दूर गोवर्धन पर्वत पर सकल नारायण गुफा स्थित है। इस गुफा की सबसे खास बात है भीतर मौजूद हथेली के आकार की विशाल चट्टान, जिसे श्रद्धालु भगवान कृष्ण का हाथ मानते हैं।
मान्यता है कि यही चट्टान पूरी गुफा को थामे हुए है और इसे लेकर कई धार्मिक कथाएं प्रचलित हैं। गुफा के भीतर भगवान श्रीकृष्ण और शेषनाग की प्रतिमाएं भी मौजूद हैं। स्थानीय मान्यताओं में इस गुफा का संबंध द्वापर और त्रेता युग से जोड़ा जाता है। लेकिन यहां की खासियत सिर्फ इसकी प्राचीन मान्यताएं नहीं, बल्कि साल में एक बार खुलने की परंपरा भी है।

गुड़ी पड़वा यानी हिंदू नववर्ष के अवसर पर गुफा श्रद्धालुओं के लिए कुछ दिनों के लिए खोली जाती है। गुफा तक पहुंचना भी किसी रोमांच से कम नहीं, करीब तीन किलोमीटर जंगल और पथरीले रास्ते पैदल तय करने पड़ते हैं। जन्माष्टमी के बजाय गुड़ी पड़वा पर यहां लगने वाला वार्षिक मेला इस धार्मिक स्थल को और खास बनाता है। आस्था, रहस्य और प्रकृति के संगम वाला सकल नारायण धाम आज भी अपने भीतर कई अनकही कहानियां समेटे हुए है।
खाद की कमी ने बदली किसानों की फसल रणनीति
बीजापुर। बीजापुर में खरीफ सीजन के दौरान खाद की उपलब्धता ने किसानों की खेती की रणनीति बदल दी है। मक्का की खेती के लिए तय लक्ष्य के मुकाबले इस बार बोआई काफी पीछे रह गई है।
कृषि विभाग ने 24 हजार 586 हेक्टेयर में मक्का बोआई का लक्ष्य रखा था, लेकिन करीब 16 हजार 100 हेक्टेयर में ही बोआई हो सकी। यानी मक्का का रकबा लक्ष्य से करीब 8 हजार 486 हेक्टेयर पीछे है। मक्का में अपेक्षाकृत ज्यादा उर्वरक की जरूरत होने के कारण किसानों को समय पर खाद नहीं मिलने की चिंता सता रही है।
यही वजह है कि कई किसान अब कम उर्वरक वाली फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। दलहन और तिलहन की बोआई को किसानों के लिए बेहतर विकल्प माना जा रहा है। कृषि विभाग ने दलहन के लिए 4 हजार 64 और तिलहन के लिए 2 हजार 650 हेक्टेयर का लक्ष्य तय किया है। इन फसलों की बोआई का समय अभी जारी है, इसलिए आने वाले दिनों में इनका रकबा और बढ़ सकता है।
किसानों को उम्मीद है कि कम खाद में वैकल्पिक फसलों से लागत और उत्पादन के बीच बेहतर संतुलन बनाया जा सकेगा।
ऐसे में खाद की उपलब्धता ने बीजापुर में सिर्फ मक्का की बोआई नहीं, बल्कि किसानों की पूरी फसल पसंद को प्रभावित किया है।
छात्रावासों में पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम
जगदलपुर। बस्तर में छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों के स्वास्थ्य को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने विशेष अभियान चलाया। धरमपुरा स्थित आदिवासी पोस्ट मैट्रिक, अनुसूचित जाति और ओबीसी छात्रावासों में स्वास्थ्य शिविर लगाया गया। अभियान के दौरान कुल 425 बालक-बालिकाओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। स्वास्थ्य टीमों ने विद्यार्थियों की जांच के साथ जरूरत के मुताबिक उपचार और स्वास्थ्य संबंधी सलाह भी दी।
खास तौर पर विद्यार्थियों की आंखों की जांच पर विशेष ध्यान दिया गया। 41वें नेत्रदान पखवाड़े के तहत बच्चों को आंखों के संक्रमण से बचाव और देखभाल के तरीके बताए गए। विद्यार्थियों को मोबाइल और टीवी स्क्रीन के अत्यधिक इस्तेमाल से बचने की सलाह दी गई। लगातार स्क्रीन देखने के दौरान बीच-बीच में आंखों को आराम देने की जरूरत भी समझाई गई।
स्वास्थ्य विभाग ने सभी छात्रावासों में नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया है। अभियान का उद्देश्य छात्रावासों में रहने वाले बच्चों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान करना है। वहीं नेत्रदान को लेकर भी विद्यार्थियों के बीच जागरूकता पैदा करने का प्रयास किया गया।
नौकरी के नाम पर युवाओं की उम्मीदों से खिलवाड़
दंतेवाड़ा। दंतेवाड़ा में रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं के बीच एक भर्ती संदेश ने उम्मीद जगाई, लेकिन बाद में यही उम्मीद नाराजगी में बदल गई।
एनएमडीसी के किरंदुल और बचेली कॉम्प्लेक्स में भर्ती और वॉक-इन इंटरव्यू का संदेश सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुपों में तेजी से प्रसारित हुआ। संदेश में करीब 24 अलग-अलग श्रेणियों में भर्ती और 18 हजार से 60 हजार रुपये तक वेतन का दावा किया गया था। 30 अगस्त को इंटरव्यू की तारीख बताई गई, जिसके बाद बड़ी संख्या में बेरोजगार युवा तैयारी कर वहां पहुंचे। लेकिन युवाओं का आरोप है कि उन्हें इंटरव्यू का स्पष्ट स्थान नहीं बताया गया।
कई युवाओं ने दिए गए संपर्क नंबरों पर फोन किया, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की बात कही। दिनभर जानकारी तलाशने के बाद कथित तौर पर उन्हें इंटरव्यू रद्द होने की जानकारी मिली। अब युवाओं ने पूरे मामले की जांच की मांग उठाई है।
सवाल यह भी है कि भर्ती करने वाली कंपनी को एनएमडीसी परिसर में भर्ती की अनुमति थी या नहीं। अगर अनुमति नहीं थी तो एनएमडीसी के नाम का इस्तेमाल कर भर्ती संदेश फैलाने वालों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है। वहीं अगर भर्ती अधिकृत थी तो इंटरव्यू रद्द होने और युवाओं को जानकारी नहीं मिलने की जिम्मेदारी तय करने की मांग है।
अस्पताल पहुंचने से पहले जिंदगी की जंग हार गई बुदरी
नारायणपुर। अबूझमाड़ के दुर्गम इलाके में एक बीमार महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए जवानों ने पूरी ताकत लगा दी, लेकिन मंजिल तक पहुंचने से पहले ही उसकी सांसें थम गईं। दिवालूर गांव की 51 वर्षीय बुदरी मंडावी पिछले 17 दिनों से लगातार बुखार से पीड़ित थीं।
बताया गया कि करीब 12 दिनों से वह सिर्फ तरल आहार पर थीं और उनकी हालत लगातार बिगड़ रही थी। परिजनों की सूचना के बाद आईटीबीपी की 29वीं वाहिनी का 16 सदस्यीय चिकित्सा एवं बचाव दल गांव के लिए रवाना हुआ। बारिश, कीचड़, फिसलन और उफनते नालों के बीच जवानों ने घंटों पैदल सफर किया। बुदरी को स्ट्रेचर पर लेकर जवान अस्पताल की ओर बढ़ते रहे।
बोटेर के पास पहुंचने से पहले जवानों ने उसकी दोबारा जांच की, जहां उसने पानी की एक घूंट भी ली। लेकिन कुछ देर बाद जांच में जीवन के संकेत नहीं मिले और उसकी मौत हो चुकी थी। बोटेर चौकी पहुंचने के बाद परिजनों को महिला की मौत की जानकारी दी गई।
पति ने अंतिम संस्कार के लिए पार्थिव शरीर पैतृक गांव दिवालूर ले जाने की इच्छा जताई। इसके बाद जवानों ने एक बार फिर उसी दुर्गम और जोखिम भरे रास्ते को चुना और पार्थिव शरीर को गांव तक पहुंचाने में मदद की।
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