Dharm Desk- Vat Savitri Vrat : ज्येष्ठ अमावस्या के पावन अवसर पर आज वट सावित्री व्रत रखा गया है. जो सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास है. आज के दिन सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस लेकर पतिव्रता धर्म की अद्भुत मिसाल पेश की थी. तभी से महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं. इस वर्ष बट सावित्री व्रत का महत्व और भी बढ़ गया है, क्योंकि आज शनिश्चरी अमावस्या और शनि जयंती का दुर्लभ संयोग बन रहा है.

शनि जयंती का दुर्लभ संयोग

ज्योतिष शास्त्र में इसे अत्यंत शुभ माना जा रहा है. कहा जा रहा है कि इस दिन पूजा-पाठ और दान करने से कई गुना अधिक फल प्राप्त हो सकता है, जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है.

व्रत न रखने वाली महिलाएं भी करें पूजा

किसी कारणवश महिलाएं व्रत नहीं रख पाई है. तब भी वे सुहागिन होने के नाते इस दिन विधिवत पूजा कर सकती है. बरगद के पेड़ के पास जाकर या घर पर ही माता सावित्री और सत्यवान की तस्वीर स्थापित कर श्रद्धा भाव से पूजा करने से भी शुभ फल मिलते हैं.

पूजा विधि और सरल उपाय

वट वृक्ष के पास जाकर जल अर्पित करें और फूल, फल, मिठाई व सुहाग की सामग्री चढ़ाएं. कच्चा सूत लेकर बरगद के पेड़ की 108 बार या 7 बार परिक्रमा करें और सूत लपेटें. पूजा के दौरान वट सावित्री व्रत कथा सुनना या पढ़ना अत्यंत लाभकारी माना जाता है. यदि घर पर पूजा कर रही हैं, तो एक छोटे गमले में बरगद का प्रतीक रूप स्थापित कर उसी विधि से पूजन कर सकती हैं. अंत में पति की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य की कामना करें.

आज के दिन शुभ योगों का विशेष प्रभाव

इस बार वट सावित्री व्रत पर शोभन योग, गजलक्ष्मी योग, बुधादित्य राजयोग और विपरीत राजयोग का भी विशेष संयोग बन रहा है. इन शुभ योगों में की गई पूजा से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. वैवाहिक जीवन में खुशहाली बनी रहती है. इस पावन दिन जरूरतमंदों को दान करना भी अत्यंत लाभ देने वाला होगा.