पटना। शहर के बेऊर केंद्रीय कारागार में मचे घमासान के बीच एक बड़ी कार्रवाई की गई है। जेल अधीक्षक नीरज कुमार झा को राज्य सरकार द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उन पर जेल के भीतर संगठित गिरोह चलाने और व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार में लिप्त रहने के गंभीर आरोप लगे हैं। यह निलंबन कारा प्रशासन और जिला प्रशासन द्वारा हाल ही में की गई छापेमारी के बाद हुई जांच का परिणाम है।

​छापेमारी और आरोपों की गंभीरता

​बीते शनिवार को जिला और कारा प्रशासन की संयुक्त टीम ने बेऊर जेल के अंदर अचानक छापेमारी की थी। यह कार्रवाई बंदियों द्वारा की गई शिकायतों के आधार पर की गई थी। जांच में जो तथ्य सामने आए, वे बेहद चौंकाने वाले और प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाते हैं।
​जेल के भीतर एक संगठित गिरोह चलाने का आरोप अधीक्षक पर लगा है। बंदियों ने आरोप लगाया था कि जेल प्रशासन द्वारा उन्हें सुविधाएं प्रदान करने के नाम पर जबरन वसूली की जा रही थी। जो बंदी पैसे देने में असमर्थ थे, उन्हें प्रताड़ित किया जाता था और सजा के तौर पर एकांत सेल (बैरक) में डाल दिया जाता था।

​अनियमितताओं का पुलिंदा

  • ​छापेमारी के दौरान जेल के अंदर कई प्रकार की अनियमितताएं पकड़ी गईं:
  • ​निजी मेस का अवैध संचालन: जेल के नियमों को ताक पर रखकर परिसर में निजी मेस चलाया जा रहा था।
  • ​दोगुनी-तिगुनी कीमतें: जेल के अंदर बिकने वाली वस्तुओं के दाम बाहर की तुलना में अत्यधिक थे। उदाहरण के लिए, 800 मिलीलीटर सरसों तेल के लिए 500 रुपये और सब्जी के लिए 200 रुपये प्रति किलो की दर से वसूली की जा रही थी।
  • ​सुविधाओं का सौदा: जेल में नियमों का पालन करने के बजाय, पैसे के बदले बंदियों को वीआईपी सुविधाएं दी जा रही थीं।

​प्रशासनिक फेरबदल

​इस घटना के बाद जेल प्रशासन ने व्यवस्था को सुधारने के लिए त्वरित कदम उठाए हैं। प्रशासनिक स्तर पर बेऊर जेल की सुरक्षा और प्रबंधन को दुरुस्त करने के लिए ज्योति कुमारी, राजीव रंजन और प्रियतम प्रियदर्शी को नया सहायक अधीक्षक नियुक्त किया गया है।
​अधीक्षक का निलंबन राज्य सरकार द्वारा जेल प्रशासन में सुधार और भ्रष्टाचार के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को स्पष्ट करता है। फिलहाल, विभागीय जांच जारी है और आने वाले समय में इसमें और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है। बेऊर जेल में हुई इस कार्रवाई से पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है।