अजयारविंद नामदेव, शहडोल। सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों तक सही जानकारी और पारदर्शिता के साथ पहुंचे, इसके लिए प्रशासन लगातार प्रयास करता है। लेकिन कई बार जानकारी के अभाव में भोले-भाले ग्रामीण बिचौलियों और दलालों के झांसे में आ जाते हैं। ऐसा ही मामला जिले के ब्यौहारी जनपद पंचायत में सामने आया है, जहां कार्यालय के मुख्य द्वार पर लगा दलालों से सावधान बोर्ड अब चर्चा और सवालों का केंद्र बन गया है। खास बात यह है कि जिस बोर्ड को कभी ग्रामीणों को ठगी से बचाने के लिए लगाया गया था, अब उसी बर्ड को हटाने की तैयारी की जा रही है।
READ MORE: अजब चोर की गजब कहानी: अस्पताल में पहले CCTV को हाथ जोड़कर किया प्रणाम, ‘हे कैमरा देवता, माफ करना’ फिर उड़ाया बाइक से पेट्रोल
दरअसल, शहडोल जिले के जनपद पंचायत ब्यौहारी कार्यालय के बाहर दीवार पर एक बोर्ड लगा है, जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि समग्र आईडी, पेंशन, सबल कार्ड, कर्मकार सहित विभिन्न योजनाओं के कार्य निशुल्क किए जाते हैं। यदि कोई व्यक्ति पैसों की मांग करता है तो उसकी शिकायत सीधे अध्यक्ष और सीईओ से करें। बताया जाता है कि यह बोर्ड उस समय लगाया गया था जब ग्रामीणों से योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर कथित दलाल पैसे वसूल रहे थे। शिकायत मिलने पर तत्कालीन जनपद अध्यक्ष और पूर्व सीईओ के निर्देश पर यह चेतावनी बोर्ड लगाया गया था।
READ MORE: टीकमगढ़ तालाब हादसा: तीन मासूमों की मौत पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने जताया शोक, 4-4 लाख की आर्थिक सहायता के दिए निर्देश
हालांकि अब वर्तमान जनपद पंचायत सीईओ कल्पना यादव ने इस पूरे मामले को पुराने कार्यकाल से जुड़ा बताते हुए कहा है कि वर्तमान में ऐसी कोई स्थिति नहीं है और अब कोई दलाल सक्रिय नहीं है। उन्होंने कहा कि यह बोर्ड पूर्व सीईओ के समय लगाया गया था और जल्द ही इसे हटवा दिया जाएगा। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि यदि अब दलाल सक्रिय नहीं हैं तो फिर वर्षों से यह बोर्ड अब तक क्यों लगा हुआ है। खास बात यह भी है कि जिस जनपद अध्यक्ष के कार्यकाल में यह बोर्ड लगाया गया था, वे आज भी पद पर बने हुए हैं। ऐसे में दलालों से सावधान का यह बोर्ड अब प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।


