​भागलपुर/अतीश दीपंकर। शहर के जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (मायागंज अस्पताल) में सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले सुरक्षाकर्मी ही आज कानून अपने हाथ में लेते नजर आए। अस्पताल परिसर में उस समय अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया जब अधीक्षक कार्यालय के सामने दो गुटों के सुरक्षाकर्मी आपस में हिंसक रूप से भिड़ गए। इस घटना ने अस्पताल की लचर सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

​विवाद की जड़: मांगें बनाम प्रबंधन

प्राप्त जानकारी के अनुसार अस्पताल में तैनात निजी सुरक्षा कंपनी के गार्ड लंबे समय से वेतन वृद्धि, नियमानुसार अवकाश और अन्य सुविधाओं की मांग कर रहे थे। अपनी इन्हीं मांगों को लेकर गार्ड शांतिपूर्ण ढंग से धरना दे रहे थे। तनाव तब बढ़ा जब कंपनी प्रबंधन को धरने की सूचना मिली। आरोप है कि प्रबंधन ने आंदोलन को कुचलने के उद्देश्य से बाहर से कुछ अन्य गार्डों को बुलाकर ड्यूटी पर तैनात करने का प्रयास किया। जब धरना दे रहे गार्डों ने इसका विरोध किया और बाहरी सुरक्षाकर्मियों को अस्पताल परिसर से जाने को कहा, तो बहस ने हिंसक मोड़ ले लिया।

​मारपीट और लाठी-डंडों से गूंजा परिसर

देखते ही देखते यह विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। दोनों गुटों के बीच जमकर लाठी-डंडे चले। इस संघर्ष में कई सुरक्षाकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। परिसर में हुई इस गुंडागर्दी के कारण अस्पताल में आए मरीजों और उनके तीमारदारों में दहशत फैल गई। अपनी सुरक्षा के लिए अस्पताल आए लोग खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे।

​मरीजों की बदहाली और ओपीडी पर असर

इस पूरी झड़प का सबसे बुरा असर अस्पताल की ओपीडी सेवाओं पर पड़ा। हड़ताल और बवाल के कारण ओपीडी काउंटर के पास लंबी कतारें लगी रहीं, लेकिन मरीजों को डॉक्टर से परामर्श और इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण यह रहा कि जिस अस्पताल में मरीजों की जान बचाने की जद्दोजहद होती है, वहां रक्षकों के आपसी झगड़े के कारण इलाज की व्यवस्था ही चरमरा गई। घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें सुरक्षाकर्मी सरेआम एक-दूसरे पर हमला करते दिख रहे हैं।

​अधीक्षक ने पल्ला झाड़ा

इस गंभीर घटना पर जब अस्पताल के अधीक्षक, प्रोफेसर एच.पी. दुबे से प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि यह सुरक्षा कंपनी और उनके गार्डों का आपसी विवाद है। उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रशासन केवल कंपनी से अनुबंध के तहत काम ले रहा है। अस्पताल परिसर में तनाव अभी भी बना हुआ है और किसी भी पक्ष में फिलहाल सुलह की कोई ठोस पहल नहीं दिख रही है, जिससे मरीजों की मुश्किलें और बढ़ने की आशंका है।