कुंदन कुमार, पटना। भोजपुर के बिलौटी गांव में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच शुरू हो चुकी है। बिहार की सम्राट सरकार ने मामले की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा के नेतृत्व में न्यायिक जांच आयोग का गठन किया है। इसी क्रम में सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने बताया कि, अधिकारियों के साथ बैठक कर मामले में आगे की जांच शुरू कर दी गई है। सरकार ने आयोग को पूरे मामले की जांच कर छह माह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का दायित्व दिया है।
घटना के हर पहलू की जांच कर रही आयोग
मीडिया से बातचीत के दौरान न्यायमूर्ति विनोद कुमार सिन्हा ने कहा कि, जांच का पहला उद्देश्य घटना की पूरी पृष्ठभूमि, घटनाक्रम तथा उन प्रत्यक्ष एवं परोक्ष परिस्थितियों की पड़ताल करना है, जिसके कारण यह घटना हुई। दूसरा महत्वपूर्ण बिंदु 17 जून को शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की जांच करना एवं आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मियों की जिम्मेदारी तय करना है।
प्रमुख गवाहों की गवाही पूरी करने की तैयारी
जानकारी के मुताबिक आयोग ने गवाहों को समन जारी करना भी प्रारंभ कर दिया है और महत्वपूर्ण गवाहों के बयान जल्द दर्ज किए जाएंगे। विनोद कुमार सिन्हा ने बताया कि उनकी कोशिश रहेगी कि प्रमुख गवाहों की गवाही जल्द पूरी कर एक अंतरिम रिपोर्ट भी समय रहते सरकार को उपलब्ध कराई जा सके।
कल भरत तिवारी के घर पहुंचे थे विनोद कुमार सिन्हा
बता दें कि न्यायिक जांच आयोग के अध्यक्ष विनोद कुमार सिन्हा कल बुधवार को भरत तिवारी के घर आरा भी पहुंचे थे, जहां उन्होंने भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात कर एक बार फिर से घटना की जानकारी ली। इस दौरान आरा के लोगों और प्रशासन में काफी गहमागहमी बनी रही। इस दौरान मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि, भरत तिवारी के एनकाउंटर का क्या औचित्य था? इसके लिए कौन जिम्मेदार है? किन परिस्थितियों में यह घटना हुई? इन सभी मुद्दों को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है।
बिहार मानवाधिकार आयोग ने अपनाया कड़ा रुख
उधर बिहार मानवाधिकार आयोग (BHRC) ने भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में प्रशासन के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा निर्देश जारी किया है। आयोग ने राज्य सरकार को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया है कि इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया और विस्तृत जांच अपनी जगह है, लेकिन मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए मृतक के माता-पिता को तुरंत प्रभाव से अंतरिम मुआवजा प्रदान किया जाए।
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