Tigdana Harappan Mound : भिवानी। हरियाणा के भिवानी जिले का तिगड़ाना गांव अपनी ऐतिहासिक विरासत के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां मौजूद हड़प्पाकालीन टीला धीरे-धीरे अपना अस्तित्व खोता जा रहा है। वर्षों से जारी खेती और अवैध मिट्टी खनन के कारण यह प्राचीन धरोहर लगातार सिमटती चली गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते प्रभावी संरक्षण नहीं होने से यह ऐतिहासिक स्थल गंभीर खतरे में पहुंच गया है।
वर्षों में तेजी से घटा टीले का आकार
ग्रामीणों के अनुसार कभी लगभग 25 एकड़ में फैला यह प्राचीन टीला अब बेहद छोटे हिस्से तक सीमित रह गया है। पिछले डेढ़ दशक के दौरान लगातार खेती और मिट्टी निकाले जाने से इसका मूल स्वरूप लगभग समाप्त हो चुका है। गांव से कुछ दूरी पर स्थित यह स्थल चारों ओर खेतों से घिरा होने के कारण निगरानी के अभाव में लगातार प्रभावित होता रहा।
पुरातत्व विभाग के दावों पर उठे सवाल
राज्य सरकार ने मार्च 2025 में तिगड़ाना और मिताथल के हड़प्पाकालीन स्थलों को संरक्षित पुरातात्विक स्थल घोषित किया था। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि घोषणा के बाद भी संरक्षण कार्य जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा। विभाग की ओर से सुरक्षा व्यवस्था और चहारदीवारी की बात कही गई थी, लेकिन अब तक उसका असर नजर नहीं आया है।
खुदाई में मिले थे प्राचीन सभ्यता के प्रमाण
तिगड़ाना में पहले हुई पुरातात्विक खुदाई के दौरान हड़प्पा सभ्यता से जुड़ी कई महत्वपूर्ण वस्तुएं मिली थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि यहां से प्राप्त अवशेष बताते हैं कि हजारों वर्ष पहले यह क्षेत्र विकसित मानव बस्ती का हिस्सा था। खुदाई में बड़ी संख्या में चूड़ियों और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं के अवशेष भी मिले थे, जिससे इसे उस समय का महत्वपूर्ण शिल्प केंद्र माना जाता है।
संरक्षण और पर्यटन की उम्मीद
स्थानीय समाजसेवियों और ग्राम पंचायत का कहना है कि इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। उनका मानना है कि यदि वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण और विकास किया जाए तो तिगड़ाना न केवल शोध का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है, बल्कि भविष्य में ऐतिहासिक पर्यटन के प्रमुख स्थलों में भी अपनी पहचान बना सकता है।
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