आरा। भोजपुर में 17 जून को हुए कथित एनकाउंटर में भरत तिवारी की मौत के बाद मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। अब इस मुद्दे पर न केवल राजनीतिक बल्कि सामाजिक और कला जगत की हस्तियों ने भी पुलिसिया कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पीड़ित परिवार अब न्याय के लिए आंदोलन की राह पर है।
एनकाउंटर या हत्या? हस्तियों ने उठाए सवाल
कवि कुमार विश्वास ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे अमानवीय करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई युवक हथियार फेंक देता है तो उसे घेरकर मारना कानून का उल्लंघन है। उन्होंने पुलिस की ट्रेनिंग और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे ‘हत्या’ बताया है। वहीं, भोजपुरी गायक रितेश पांडेय ने पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद इसे सुनियोजित हत्या करार देते हुए परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया है। प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन महाराज ने भी दुख व्यक्त करते हुए कहा कि भरत तिवारी गरीबों की आवाज थे और उन्हें न्याय मिलना चाहिए।
एसपी पर धमकाने का आरोप
मृतक के भाई चंदन तिवारी ने भोजपुर के एसपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। चंदन का कहना है कि 24 जून की रात एसपी अपनी पूरी टीम के साथ बिना किसी अनुमति के उनके घर में घुस आए और उन पर केस वापस लेने का दबाव बनाया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस प्रशासन घटना को दबाने की पुरजोर कोशिश कर रहा है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
चंदन तिवारी ने पुलिस की दोहरी नीति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज हो चुकी है, तो अब तक शाहपुर थाना एसएचओ और जगदीशपुर एसडीपीओ की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई? उन्होंने तर्क दिया कि एक आम नागरिक को छोटी गलती पर तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाता है, लेकिन वर्दी वालों को संरक्षण क्यों दिया जा रहा है?
हाईकोर्ट के वर्तमान जज से जांच की मांग
पूरे मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए पीड़ित परिवार ने मांग की है कि इस एनकाउंटर की जांच किसी रिटायर्ड जज से नहीं, बल्कि पटना हाई कोर्ट के वर्तमान जज की निगरानी में कराई जाए। चंदन तिवारी ने साफ कर दिया है कि वे पुलिस के दबाव में झुकने वाले नहीं हैं और अपने भाई को न्याय दिलाने के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष करेंगे। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी है कि जनता सब देख रही है और पुलिस को इस एनकाउंटर का जवाब देना ही होगा।

