शिखिल ब्यौहार, भोपाल। राजधानी भोपाल में नगर निगम द्वारा व्यापारियों को दी जा रही नोटिस की कार्रवाई पर भोपाल चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। चैंबर के अध्यक्ष गोविंद गोयल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर व्यापारियों का पक्ष लेते हुए नगर निगम की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए सालों पुरानी दुकानों पर कार्रवाई करना हजारों परिवारों की रोजी-रोटी पर सीधा हमला है।

10 दिन में दुकान बंद करने का नोटिस, 30 हजार व्यापारी प्रभावित

दावा किया गया है कि नगर निगम की ओर से करीब 30 हजार व्यापारियों को 10 दिन के भीतर दुकानें बंद करने का नोटिस थमाया गया है। जिस पर गोविंद गोयल ने कहा कि दशकों पुरानी दुकानें अचानक बंद करा दी जाएंगी तो ये छोटे व्यापारी कहां जाएंगे?

उन्होंने आगे कहा कि जब व्यापारियों के पास नगर निगम का लाइसेंस, GST रजिस्ट्रेशन और गुमास्ता जैसे सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं तो फिर उन पर यह बुलडोजर जैसी कार्रवाई क्यों की जा रही है?

नया मास्टर प्लान लागू होने तक राहत और ‘मिक्स्ड लैंड यूज़’ की मांग

भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स ने सरकार और प्रशासन के सामने प्रमुख मांगें रखी हैं। उनका कहना है कि शहर के प्रमुख व्यावसायिक मार्गों पर ‘मिक्स्ड लैंड यूज़’ लागू किया जाए ताकि सालों से चल रहे व्यापार को कानूनी मान्यता मिल सके।

मांग की है कि जब तक भोपाल का नया मास्टर प्लान लागू नहीं हो जाता, तब तक निगम की इस कार्रवाई पर तुरंत रोक दी जाए। बिना किसी वैकल्पिक जगह या पुनर्वास योजना के दुकानों को बंद न कराया जाए।

CM मोहन यादव को सौंपा ज्ञापन, मिला आश्वासन

गोविंद गोयल ने बताया कि इस गंभीर मुद्दे को लेकर चैंबर का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात कर ज्ञापन सौंप चुका है। मामले पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा है कि यह पूरा मामला मेरे संज्ञान में है, मैं इसे खुद देखता हूं।

‘कॉरपोरेट को फायदा, छोटे व्यापारियों का नुकसान’

चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि इस तरह की एकतरफा कार्रवाई से छोटे और मझोले व्यापारियों पर रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। इससे करोड़ों रुपये का निवेश डूब जाएगा और इसका सीधा फायदा बड़े कॉरपोरेट घरानों को मिलेगा। गोविंद गोयल ने मीडिया के माध्यम से सरकार से समाधान की अपील करते हुए कहा कि चैंबर सरकार से बातचीत के लिए हर समय तैयार है लेकिन जब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल जाता तब तक निगम अपनी कार्रवाई रोके।

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