शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और भ्रष्टाचार की पोल खोलती हुई एक बेहद सनसनीखेज और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। राजधानी को जोड़ने वाले बहुचर्चित ‘जीजी फ्लाईओवर’ में महज डेढ़ साल के भीतर ही जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। जिस ब्रिज को 130 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार किया गया था, वह पहली-दूसरी बारिश और कुछ महीनों के ट्रैफिक में ही उधड़ने लगा है। इस कड़क लापरवाही ने लोक निर्माण विभाग और जिम्मेदार ठेकेदारों की पोल खोलकर रख दी है।
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130 करोड़ स्वाहा! गायत्री मंदिर से गणेश मंदिर के बीच फैला सस्पेंस
इस फ्लाईओवर के निर्माण और इसकी वर्तमान हालत ने प्रशासनिक दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगभग 3 किलोमीटर लंबा यह विशालकाय जीजी फ्लाईओवर गायत्री मंदिर से गणेश मंदिर के बीच बनाया गया है। यह ब्रिज पुराने शहर को नए शहर से जोड़ने वाली भोपाल की सबसे अहम लाइफलाइन माना जाता है।
1.5 साल में ही खुली पोल
महज 18 महीने पहले इस 3 किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर का लोकार्पण बड़े-बड़े दावों के साथ किया गया था। लेकिन आज स्थिति यह है कि ब्रिज की सड़क जगह-जगह से उधड़ चुकी है और गहरे गड्ढे हादसों को न्योता दे रहे हैं।
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नाम बदला… लेकिन नहीं बदली निर्माण की नीयत!
निर्माण के समय इसे ‘जीजी फ्लाईओवर’ के नाम से जाना जाता था, जिसका नाम बाद में बदलकर संविधान निर्माता ‘डॉ. भीमराव अंबेडकर फ्लाईओवर’ कर दिया गया। नाम भले ही बदल दिया गया हो, लेकिन 130 करोड़ रुपये की जनता के टैक्स की कमाई से बने इस ब्रिज के घटिया निर्माण की नीयत नहीं बदली। रोजाना इस ब्रिज से हजारों गाड़ियां और राहगीर गुजरते हैं, जहां तेज रफ्तार में गड्ढों के कारण कभी भी बड़ा और भयानक हादसा हो सकता है।
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