शिखिल ब्यौहार, भोपाल।  सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राजधानी भोपाल में शुरू हुई सीलिंग कार्रवाई पूरी तरह खानापूर्ति बनकर रह गई है। नगर निगम ने जिन रिहायशी इलाकों में चल रही कमर्शियल गतिविधियों को सील किया था, व्यापारियों ने खुद ही सील तोड़कर फिर से दुकानें खोल दीं। रेसीडेंशियल एरिया में एक बार फिर धड़ल्ले से कमर्शियल एक्टिविटी शुरू हो गई है। 

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया था कि रिहायशी क्षेत्रों में नियम विरुद्ध चल रही दुकानों, ऑफिस और शोरूम पर सख्त कार्रवाई की जाए। इसके बाद नगर निगम ने शाहपुरा, अरेरा कॉलोनी, कोलार और एमपी नगर के रिहायशी इलाकों में कई व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को सील किया था। निगम ने दावा किया था कि अब रिहायशी इलाकों में कमर्शियल उपयोग नहीं होने दिया जाएगा। लेकिन हकीकत इसके उलट निकली। व्यापारियों ने सील तोड़ दी। शाहपुरा में एक जिम, अरेरा कॉलोनी में बुटीक और कोचिंग सेंटर, कोलार में रेस्टोरेंट फिर से खुल गए। स्थानीय रहवासियों ने शिकायत की, लेकिन निगम के अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। 

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन कमर्शियल गतिविधियों के कारण पार्किंग, शोर और ट्रैफिक की समस्या बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें उम्मीद थी कि कॉलोनी में शांति लौटेगी, लेकिन निगम की लापरवाही से सब पुराने ढर्रे पर लौट आया। नियम के मुताबिक सील तोड़ना गंभीर अपराध है और इसमें FIR दर्ज होनी चाहिए, लेकिन नगर निगम ने अब तक किसी के खिलाफ FIR नहीं कराई। सिर्फ कागजों में पंचनामा बनाकर खानापूर्ति कर दी गई। सवाल उठ रहा है कि क्या नगर निगम रसूखदार व्यापारियों के सामने नतमस्तक है। एक बार फिर राजधानी में सिर्फ नाम की कार्यवाही की गई।

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