गिरी हुई बूंदें वापस नहीं आतीं जबकि प्रयास कर के एक नया सागर बनाया जा सकता है। अतीत सबक लेने के लिए है बोझ की तरह ढोने के लिए नहीं। गलतीयों पर आँसू बहाने की जगह अपनी अगली कोशिश पर विश्वास कीजिए। बीता कल जो हाथ से निकल गया उसे छोड़िए और आज को सँवारने मे जुट जाइए।
“गतं न शोचन्ति पण्डिताः।” संस्कृत के इस नीति-वाक्य के अनुसार बुद्धिमान व्यक्ति बीत चुकी बातों पर शोक नहीं करता।
“Don’t cry over spilt milk.” अंग्रेजी के इस प्रसिद्ध कहावत का शाब्दिक अर्थ है ‘दूध गिर जाने के बाद उसके लिए रोने से वह वापस बर्तन में नहीं आ सकता।‘ मगर भावार्थ है कि बीती बातों पर दुख न करो। जब तक जीवन है ग़लतियाँ होती रहेंगी। सच तो यह है कि जो हो चुका है उसे बदला नहीं जा सकता। समझदारी इसमें है कि नुकसान से सीखें और आगे की सावधानी तय करें। अतीत को बदला नहीं जा सकता बीता हुआ कल वापस नहीं आ सकता बस पुरानी ग़लतियों से भविष्य के लिए सीख ली जा सकती है। यदि कल का कोई निर्णय गलत था तो उससे सीखिए। यदि कोई अवसर छूट गया था तो अगली संभावना के लिए तैयार हो जाइए। यदि कोई रिश्ता टूट गया हो तो उसमे अपनी गलतियों को समझिए। अतीत का सबसे अच्छा इस्तेमाल पछतावा नहीं तजुर्बा है। ग़लती अंत नहीं भविष्य की सीख है।
सफल व्यक्ति मे एक खासियत होती है कि वह अपनी गलती को अंतिम सत्य कभी नहीं मानते बल्कि इस बात का आंकलन करते हैं कि गलती कहाँ हुई और अगली बार क्या बेहतर किया जा सकता है? जीवन सब कुछ हमारे नियंत्रण मे नहीं होता। हर नुकसान को रोका नहीं जा सकता और हर परिस्थिति को अपने मुताबिक बनाया नहीं जा सकता तो जो चला गया, उसे जाने दीजिए। अगला शानदार कदम पछतावे से ज्यादा जरूरी है। गलत रास्ते के चुनाव से पूरी यात्रा समाप्त नहीं होती बल्कि दिशा सुधारकर फिर से आगे बढ़ा जाता है। एक भूल आपकी पूरी पहचान नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि गलती के बाद आपने ऐसा क्या किया कि उसका दोहराव न हो। जैसे भारत ने आजादी की लड़ाई कैसे लड़ी और ग़ुलामी की ज़ंजीर कैसे तोड़ी यह जान लेने के बाद यह समझना भी बहुत महत्वपूर्ण है कि भारत किस भूल की वजह से ग़ुलाम हुआ था। उस भूल को फिर से ना करना आज हमारे हाथ मे है।
संदीप अखिल
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम


