Bihar news: बिहार में बैंकों की कार्यप्रणाली पर राज्य सरकार ने तीखा रुख अपना लिया है। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) की हालिया बैठक में बिहार के उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने बैंकों के लचर प्रदर्शन पर जमकर नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बार-बार चेतावनी के बावजूद लोन वितरण में बैंकों द्वारा बरती जा रही उदासीनता अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सीडी रेशियो में फिसड्डी साबित हुए बैंक
बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों ने बैंकों की पोल खोल दी। बिहार का क्रेडिट-डिपॉजिट (CD) रेशियो मात्र 58.68 प्रतिशत दर्ज किया गया। वार्षिक साख लक्ष्य के मोर्चे पर भी बैंक फिसड्डी रहे 3,36,000 करोड़ रुपये के लक्ष्य के विरुद्ध केवल 2,84,632 करोड़ रुपये (84.71 प्रतिशत) का ऋण ही वितरित किया जा सका। विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने कन्वेनर बैंक SBI को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि प्रदर्शन में अपेक्षित सुधार न होना चिंताजनक है।
कॉमर्शियल बैंकों का प्रदर्शन सबसे खराब
क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति और भी स्पष्ट हो जाती है। कृषि क्षेत्र में 68.03 प्रतिशत और एमएसएमई (MSME) सेक्टर में 84.26 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की गई। वहीं कॉमर्शियल बैंकों का प्रदर्शन सबसे निराशाजनक रहा, जिनका सीडी रेशियो महज 55.33 प्रतिशत रहा। इसके उलट, कॉपरेटिव बैंकों का प्रदर्शन शानदार रहा, जिन्होंने 168.78 प्रतिशत का सीडी रेशियो हासिल किया। लघु वित्तीय बैंकों ने तो 200 प्रतिशत से अधिक का अनुपात दर्ज कर अपनी कार्यक्षमता का लोहा मनवाया है।
प्रधानमंत्री से की जाएगी शिकायत
उपमुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि यदि बैंकों के रवैये में सुधार नहीं हुआ तो वे इस मामले को सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष उठाएंगे। उन्होंने इसे जनहित के विरुद्ध मानते हुए अस्वीकार्य करार दिया है। हालांकि बैंकिंग प्रणाली को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से इसी बैठक में बिहार कृषि ऋण पोर्टल का भी लोकार्पण किया गया, जिसे वित्त विभाग ने किसानों को आसानी से क्रेडिट उपलब्ध कराने के लिए विकसित किया है।
सरकार की इस चेतावनी का उद्देश्य बैंकों को जवाबदेह बनाना और राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए ऋण वितरण में तेजी लाना है। अब देखना यह होगा कि क्या बैंक अपनी कार्यशैली में सुधार करते हैं या उन पर कोई दंडात्मक कार्रवाई की जाती है।

