कुंदन कुमार/पटना: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वीआईपी कल्चर’ को खत्म करने और सादगी अपनाने के आह्वान का असर अब पूरे देश में दिखने लगा है। इसी कड़ी में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक अनूठी पहल पेश की है। आज पटना की सड़कों पर लोग तब हैरान रह गए जब उन्होंने सूबे के मुखिया को बिना किसी भारी सुरक्षा घेरे और गाड़ियों के काफिले के, एक आम नागरिक की तरह पैदल चलते देखा।

​सरकारी आवास से सचिवालय तक का सफर

​मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आज सुबह अपने सरकारी आवास से मुख्यमंत्री सचिवालय (पुराना सचिवालय) के लिए पैदल ही निकल पड़े। आमतौर पर मुख्यमंत्री का काफिला दर्जनों गाड़ियों और कड़े सुरक्षा इंतजामों के साथ निकलता है, लेकिन आज सम्राट चौधरी ने इस परंपरा को तोड़कर सादगी का परिचय दिया। उनके इस कदम की चर्चा पूरे बिहार के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में हो रही है।

​अधिकारियों में भी दिखा अनुशासन का जोश

​मुख्यमंत्री को पैदल चलता देख उनके साथ मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों ने भी कदमताल मिलाई। सम्राट चौधरी अपने अधिकारियों के साथ पैदल ही सचिवालय पहुंचे। रास्ते में उन्होंने न केवल शहर की व्यवस्थाओं का जायजा लिया, बल्कि अधिकारियों को समयबद्धता और अनुशासन का कड़ा संदेश भी दिया। यह पहल दर्शाती है कि शासन अब फाइलों तक सीमित नहीं, बल्कि जमीन पर उतरकर काम करने में विश्वास रखता है।

​प्रधानमंत्री मोदी की कार्यशैली का प्रभाव

​राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सम्राट चौधरी के इस कदम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली का स्पष्ट प्रभाव दिखता है। जिस तरह पीएम मोदी समय-समय पर प्रोटोकॉल तोड़कर जनता के बीच जाते हैं, ठीक उसी तरह बिहार के मुख्यमंत्री ने भी जनता से सीधा जुड़ाव और ‘सेवक’ वाली छवि को प्राथमिकता दी है। मुख्यमंत्री का यह पैदल सफर केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि बिहार की नई कार्य-संस्कृति का प्रतीक है।