कुंदन कुमार/ पटना। बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार ने हाल ही में समाज में बढ़ती लिंग आधारित हिंसा पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारे समाज में महिलाओं के खिलाफ अपराध न केवल बढ़ रहे हैं, बल्कि उनका स्वरूप और अधिक भयावह होता जा रहा है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, उन्होंने पुलिस बल, विशेषकर महिला अधिकारियों को कार्यप्रणाली में आमूलचूल बदलाव लाने और पीड़ितों के प्रति अधिक संवेदनशील होने का निर्देश दिया है।
पुलिस बल में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
डीजीपी ने इस बात पर गर्व जताया कि आज बिहार पुलिस बल में महिलाओं की संख्या 30% से अधिक हो चुकी है। यह बदलाव महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। सरकार भी लिंग आधारित हिंसा को रोकने के लिए निरंतर नीतिगत प्रयास कर रही है। हालांकि, डीजीपी ने जोर देकर कहा कि केवल संख्या बल बढ़ाना काफी नहीं है, बल्कि कार्यस्थल और फील्ड पर पुलिस का व्यवहार ही असली बदलाव लाएगा।
युवाओं में बढ़ता अपराध और गैंग कल्चर
हाल ही में मोतिहारी में हुई एक दुखद घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे एक छात्र की हत्या उसके ही दोस्तों ने महज एक प्रेम प्रसंग (गर्लफ्रेंड) के विवाद में कर दी। यह घटना दर्शाती है कि बिहार में युवा तेजी से अपराध की ओर आकर्षित हो रहे हैं और छोटी-छोटी बातों पर ‘गैंग’ बनाकर हिंसक वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। यह सामाजिक ताने-बाने के लिए एक बड़ी चुनौती है।
संवेदनशीलता: पीड़ित को दोबारा पीड़ित न बनाएं
डीजीपी विनय कुमार ने महिला पुलिस अधिकारियों से सीधा संवाद करते हुए कहा कि बलात्कार और एसिड अटैक जैसे जघन्य मामलों को अत्यधिक संवेदनशीलता के साथ संभाला जाना चाहिए। उन्होंने स्वीकार किया कि समाज में महिलाओं से जुड़े बहुत कम मामले दर्ज हो पाते हैं।
इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं: पहला, कभी-कभी पुलिस मामला दर्ज करने में आनाकानी करती है, और दूसरा, सामाजिक दबाव पीड़ित को चुप रहने पर मजबूर कर देता है।
उन्होंने पुलिस अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा, वर्दी और रिवॉल्वर का अर्थ सत्ता का प्रदर्शन नहीं, बल्कि सेवा है। जब कोई पीड़ित आपके पास आए, तो अपने रवैये का विशेष ध्यान रखें। उन्हें फिर से प्रताड़ित महसूस न होने दें।
दहेज और व्यक्तिगत आचरण
हैरानी की बात यह है कि पुलिस विभाग के भीतर से भी दहेज उत्पीड़न की कई शिकायतें डीजीपी के सामने आ रही हैं। इस पर उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए स्वयं का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि वे अनजान कॉल आने पर भी मर्यादा और सम्मान के साथ बात करते हैं। यही शालीनता और नरमी हर पुलिसकर्मी के व्यवहार में होनी चाहिए, ताकि जनता का भरोसा पुलिस पर बना रहे।
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