वैशाली। जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक पति ने अपनी गर्भवती पत्नी को धोखे से अस्पताल ले जाकर ‘अपेंडिक्स का ऑपरेशन’ बताने के बहाने उसका लिंग परीक्षण करवा दिया। जैसे ही उसे पता चला कि गर्भ में पल रहा बच्चा एक लड़की है, उसने अपनी पत्नी पर जुल्मों की सारी हदें पार कर दीं।

​धोखे से भ्रूण जांच और गर्भपात का दबाव

​पीड़िता की मां द्वारा राज्य महिला आयोग में दिए गए आवेदन के अनुसार, शादी 13 दिसंबर 2021 को हुई थी। जब विवाहिता चार महीने की गर्भवती थी, तब उसे अपेंडिक्स के दर्द का झांसा देकर अस्पताल ले जाया गया। वहां अवैध रूप से लिंग जांच कराई गई। दामाद के परिवार में पहले से ही एक भतीजी थी, इसलिए वे दूसरी लड़की नहीं चाहते थे। लिंग का पता चलते ही पत्नी पर गर्भपात के लिए दबाव बनाया गया और इनकार करने पर उसे बेरहमी से पीटा गया।

​दहेज की भूख और हत्या का प्रयास

​आरोप है कि शादी में 10 लाख रुपये खर्च करने के बावजूद ससुराल वाले अतिरिक्त 5 लाख रुपये की मांग कर रहे थे। प्रताड़ना का सिलसिला यहीं नहीं थमा; पीड़िता का आरोप है कि 12 जनवरी 2026 को उसके गले में गमछा डालकर उसे फांसी लगाने की कोशिश की गई। जब उसने पुलिस (112) को बुलाया, तो उचित कार्रवाई नहीं हुई। पीड़िता की मां का कहना है कि दामाद राजनीतिक रसूख और स्थानीय विधायक के प्रभाव का इस्तेमाल कर पुलिस पर दबाव बनाता है।

​कोठे पर बिठाने की धमकी और कानूनी लड़ाई

​पीड़िता ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि उसका पति उसे न केवल गंदी गालियां देता है, बल्कि उसे ‘कोठे पर बिठाने’ जैसी घिनौनी धमकियां भी देता है। फिलहाल महिला की 2 साल की एक बेटी है, जिसकी परवरिश की खातिर वह अब भी सुलह की उम्मीद रखती है, बशर्ते मारपीट बंद हो। दूसरी ओर, पति ने इन आरोपों को नकारते हुए मायके वालों के हस्तक्षेप को विवाद की वजह बताया है।

​महिला आयोग का रुख

​बिहार राज्य महिला आयोग की सदस्य रश्मि रेखा सिन्हा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई में दोनों पक्षों को सबूतों के साथ तलब किया है। आयोग विशेष रूप से अवैध लिंग जांच के दावों की पड़ताल करेगा। आयोग की प्राथमिकता परिवार को टूटने से बचाना है, लेकिन अपराध सिद्ध होने पर सख्त कार्रवाई की बात भी कही गई है।