कुंदन कुमार, पटना। बिहार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार ने पूरी ताकत झोंक दी है। एक तरफ जहां स्वास्थ्य विभाग ने जलभराव वाले इलाकों में मेडिकल कैंप और डॉक्टरों की तैनाती का पुख्ता इंतजाम किया है, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुद मैदान में उतरकर राहत और बचाव कार्यों की कमान संभाल ली है। सरकार का मुख्य उद्देश्य बाढ़ की विभीषण मार झेल रहे हर नागरिक तक समय पर भोजन, चिकित्सा और आवश्यक सहायता पहुंचाना है।

​स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का सख्त निर्देश: स्कूलों और पंचायत भवन में शुरू हुआ इलाज

​बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने बाढ़ पीड़ितों के स्वास्थ्य को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों के भीतर ही स्कूल और पंचायत भवनों को अस्थायी चिकित्सा केंद्रों में बदल दिया गया है, जहां इलाज की प्रक्रिया युद्ध स्तर पर शुरू हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग को पहले ही कड़े निर्देश जारी किए जा चुके हैं, जिसके तहत ज़मीनी स्तर पर काम तेज कर दिया गया है।
​मंत्री निशांत ने जानकारी दी कि बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों में जीवन रक्षक दवाइयों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इसके साथ ही प्रभावित इलाकों में डॉक्टरों और नर्सों की विशेष टीमों को तैनात किया गया है, ताकि किसी भी मरीज को दूर न जाना पड़े। स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह तत्पर है और यह सुनिश्चित कर रहा है कि लोगों को इलाज के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो।

​मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने संभाला मोर्चा: वैशाली और सारण में किया सामुदायिक रसोई का निरीक्षण

​राहत कार्यों की रफ्तार और गुणवत्ता की खुद समीक्षा करने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वैशाली और सारण जिलों के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर मोर्चा संभाल लिया है। मुख्यमंत्री ने वहां संचालित सामुदायिक रसोई का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अपनी मौजूदगी में बाढ़ पीड़ितों को अपने हाथों से खाना परोसा और आम जनता के साथ बैठकर खुद भी भोजन किया, जिससे लोगों का मनोबल बढ़ा।
​निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी बाढ़ प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों (DM) और पुलिस अधीक्षकों (SP) को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे यह सुनिश्चित करें कि प्रशासन की तरफ से बाढ़ पीड़ितों को हरसंभव सहूलियत मुहैया कराई जाए। लापरवाही बरतने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

​राहत और बचाव कार्यों के जमीनी आंकड़े

​सरकार की तरफ से जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य में राहत एवं बचाव कार्य व्यापक पैमाने पर चलाए जा रहे हैं:

  • ​सामुदायिक रसोई: वर्तमान में राज्यभर के बाढ़ प्रभावित इलाकों में कुल 226 सामुदायिक रसोई पूरी क्षमता से संचालित हो रही हैं।
  • ​भोजन वितरण: अब तक इन रसोई के माध्यम से करीब 3.75 लाख लोगों को गरमा-गरम भोजन कराया जा चुका है।
  • ​राहत शिविर: कुल 4 राहत शिविरों की स्थापना की गई है, जिनमें 2,505 बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए आवास, भोजन और चिकित्सा की मुकम्मल व्यवस्था की गई है।
  • ​सामग्री वितरण: जरूरतमंदों के बीच अब तक 81,100 पॉलीथिन शीट और 19,000 ड्राई राशन पैकेट का सफलतापूर्वक वितरण किया जा चुका है।
  • ​परिवहन और सुरक्षा: बाढ़ क्षेत्रों में आवागमन और आबादी के लिए कुल 1,602 नावें लगातार संचालित हो रही हैं। इसके अलावा, किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की 37 विशेष टीमों को तैनात किया गया है।

​सरकार की इन तमाम व्यवस्थाओं से साफ है कि प्रशासन हर मोर्चे पर मुस्तैद है और बाढ़ की स्थिति पर लगातार पैनी नजर रखी जा रही है।