कुंदन कुमार/ पटना। ​बिहार की राजधानी पटना स्थित कृषि भवन में एक महत्वपूर्ण पहल का आगाज हुआ है। बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने खेत बचाओ अभियान का विधिवत शुभारंभ करते हुए राज्य की कृषि नीति में बदलाव का स्पष्ट संकेत दिया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य रासायनिक खादों (फर्टिलाइजर) के अंधाधुंध प्रयोग को कम कर जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना है।

​स्वास्थ्य और पैदावार के बीच का संतुलन

​कृषि मंत्री ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल से भले ही पैदावार में तात्कालिक बढ़ोतरी दर्ज की गई हो लेकिन इसका मानवीय स्वास्थ्य पर घातक प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार में लगातार बढ़ती अस्पतालों की संख्या का एक बड़ा कारण रसायनों युक्त भोजन का सेवन है। यह अभियान लोगों को जहरमुक्त खेती की ओर प्रेरित करने के लिए एक बड़ा कदम है।

​औषधीय खेती पर विशेष जोर

​मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बिहार के किसानों से एक अनूठा आग्रह किया है। उन्होंने राज्य के सभी किसानों से अपने कुल खेत के कम से कम एक चौथाई हिस्से में औषधीय पौधे लगाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बिहार एक कृषि आधारित प्रदेश है और यहां के किसानों की मेहनत ही इस राज्य की सबसे बड़ी पूंजी है। यदि किसान अपनी परंपरागत खेती के साथ औषधीय और प्राकृतिक खेती को जोड़ लें तो न केवल उनकी आय बढ़ेगी बल्कि समाज स्वस्थ भी होगा।

​बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने का संकल्प

​बिहार में लगभग चार लाख एकड़ बंजर भूमि के मुद्दे पर चर्चा करते हुए उन्होंने आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार प्राकृतिक खेती के माध्यम से बंजर भूमि को भी उपजाऊ और हरा-भरा बनाया जा सकता है। उन्होंने संकल्प लेते हुए कहा अब मैं प्रकृति का पुजारी बन चुका हूं और मेरा लक्ष्य बिहार की हर इंच जमीन को रसायनों के प्रभाव से मुक्त करना है।
​यह अभियान निश्चित रूप से बिहार के कृषि परिदृश्य में एक सकारात्मक बदलाव लाएगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ जीवन का आधार तैयार करेगा।